धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बना ग्लोबल न्यूज़; BBC बोला-"छात्रों के आगे मोदी सरकार...",जानें दुनिया भर के मीडिया ने कैसे सुनाई खरी-खरी
punjabkesari.in Saturday, Jul 25, 2026 - 08:01 PM (IST)
International Desk: NEET पेपर लीक मामले को लेकर लगातार 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी बड़ी सुर्खियां बटोरी हैं। ब्रिटेन के BBC और द गार्डियन से लेकर अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT), CNN, कतर के अल जजीरा और पाकिस्तान के डॉन तक कई प्रमुख मीडिया संस्थानों ने इस घटनाक्रम को भारत की राजनीति और छात्र आंदोलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है। हालांकि, इन सभी रिपोर्टों में व्यक्त विचार संबंधित मीडिया संस्थानों के अपने विश्लेषण हैं।
क्यों बना वैश्विक चर्चा का विषय?
अंतरराष्ट्रीय मीडिया का मानना है कि NEET पेपर लीक विवाद केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह युवाओं की बेरोजगारी, सरकारी जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया। इसी कारण दुनिया के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को प्रमुख खबर के रूप में प्रकाशित किया।

BBC
BBC ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि वर्ष 2014 से सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आमतौर पर विरोध प्रदर्शनों के सामने झुकने से बचती रही है। रिपोर्ट के अनुसार, किसान आंदोलन के बाद कृषि कानूनों की वापसी के अलावा यह दूसरा बड़ा मौका है जब सरकार को व्यापक जनदबाव का सामना करना पड़ा। BBC के मुताबिक, सरकार ने शुरुआती दौर में छात्र आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद देशभर में आंदोलन तेज हो गया। रिपोर्ट में कहा गया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने आंदोलन में शामिल छात्रों को अपनी जीत का एहसास कराया है।

द गार्डियन
ब्रिटेन के अखबार द गार्डियन ने लिखा कि भाजपा सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में पहली बार प्रधानमंत्री मोदी के करीबी और भरोसेमंद मंत्रियों में से किसी एक को सार्वजनिक दबाव के चलते पद छोड़ना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, छात्र संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर का युवा आंदोलन बन गया। इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया।

न्यूयॉर्क टाइम्स
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि छात्र आंदोलन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में बदल गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, आंदोलन की अगुवाई करने वाले छात्र समूहों को पहले धर्मेंद्र प्रधान ने गंभीरता से नहीं लिया था और एक इंटरव्यू में उन्हें "आतंकवादियों की बी-टीम" तक कहा था। NYT ने लिखा कि अब उनके इस्तीफे के बाद आंदोलन और अधिक मजबूत हो सकता है तथा छात्र अपनी अन्य मांगों को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

CNN
CNN ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि शुरुआत में सोशल मीडिया पर मीम के रूप में शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय छात्र आंदोलन में बदल गया। रिपोर्ट में कहा गया कि इस आंदोलन ने छात्रों और बेरोजगार युवाओं को जवाबदेही, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और रोजगार जैसे मुद्दों पर एकजुट कर दिया। CNN ने अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 36 करोड़ से अधिक युवा हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 25 वर्ष या उससे कम उम्र के लगभग 40 प्रतिशत स्नातक बेरोजगार हैं, जबकि 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 20 प्रतिशत युवा रोजगार से वंचित हैं।

अल जजीरा औऱ डॉन
अल जजीरा ने लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हाल के वर्षों में मोदी सरकार के खिलाफ हुए सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक के बाद आया है। रिपोर्ट में कहा गया कि आंदोलन के दौरान युवाओं ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और लंबे समय तक प्रदर्शन जारी रखा।पाकिस्तान के अखबार डॉन ने लिखा कि देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन और परीक्षा पेपर लीक मामले में जवाबदेही की मांग के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।रिपोर्ट के अनुसार, इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय गान गाया, मिठाइयां बांटी और इसे अपनी बड़ी जीत बताया। डॉन ने इसे हाल के वर्षों के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक बताया।
