AI और ज्योतिष का अनूठा संगम! बताया किस तारीख को थमेगा ईरान-इजरायल-अमेरीका युद्ध
punjabkesari.in Sunday, Apr 05, 2026 - 11:25 AM (IST)
नेशनल डेस्क: तकनीक और प्राचीन भारतीय ज्ञान के मेल से क्या भविष्य की सटीक भविष्यवाणी संभव है? ग्वालियर स्थित माधव इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (MITS) के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एके वाधवानी के एक शोध ने इस चर्चा को जन्म दे दिया है। प्रो. वाधवानी ने एक ऐसा 'न्यूरल नेटवर्क मॉडल' तैयार किया है, जो दावा करता है कि दुनिया वर्तमान में तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर है।
यह मॉडल केवल विनाश की चेतावनी ही नहीं देता, बल्कि खगोलीय गणनाओं के आधार पर युद्ध की समाप्ति की तिथि भी बताता है।
महाभारत काल जैसी बन रही हैं परिस्थितियां
प्रो. वाधवानी के 'वर्ल्ड वॉर-3 ड्यूरेशन मॉडल' के अनुसार, वर्तमान वैश्विक हालात की तुलना 5,861 वर्ष पूर्व हुए महाभारत युद्ध से की जा रही है। शोध का दावा है कि बृहस्पति (गुरु) ग्रह वर्ष 2032 तक 'अतिचारी' स्थिति में रहेंगे, जो ठीक वैसी ही खगोलीय स्थिति है जैसी महाभारत के समय थी। मॉडल के अनुसार, यह कोई एकमुश्त होने वाला युद्ध नहीं बल्कि एक 'रुक-रुक कर चलने वाला महासंग्राम' है। इसमें पारंपरिक हथियारों के अलावा कूटनीतिक, साइबर और आर्थिक युद्ध (Economic War) के माध्यम से षड्यंत्रों का दौर 2032 तक जारी रहने की संभावना जताई गई है।
कैसे काम करता है यह AI मॉडल?
इस शोध में 'इंडियन नॉलेज सिस्टम' (ज्योतिष) के डेटा को 'एरर बैक प्रोपेगेशन' न्यूरल नेटवर्क (AI) के जरिए प्रोसेस किया गया है।
डेटा ट्रेनिंग: मॉडल को प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के समय ग्रहों (सूर्य, मंगल, शनि, राहु, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो) की दूरियों और स्थितियों के डेटा पर ट्रेन किया गया है।
वैज्ञानिक आधार: यह मॉडल ग्रहों की चाल और उनके आपसी कोणीय प्रभाव को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मापता है।
ईरान-इजरायल तनाव और शांति का पूर्वानुमान
मॉडल की गणना के अनुसार, वर्तमान में जारी ईरान-इजरायल-अमरीका तनाव की स्थिति 27 फरवरी, 2026 की शाम (7:14 बजे) से अधिक विकट हुई है, जब सूर्य, राहु और शनि के मध्य आए थे। हालांकि, राहत की बात यह है कि मॉडल ने संघर्ष विराम की तारीख भी बताई है।
भविष्यवाणी: 20 अप्रैल, 2026 को तड़के 03:47 बजे जब मंगल और शनि की दूरी 'शून्य' हो जाएगी, तब यह वैश्विक तनाव शांत होने की उम्मीद है।
उद्देश्य: भय नहीं, 'प्री-वॉर्निंग'
प्रो. एके वाधवानी का कहना है कि इस मॉडल का उद्देश्य दुनिया में डर फैलाना नहीं है। उनके अनुसार, "यह केवल एक 'प्री-वॉर्निंग' (पूर्व चेतावनी) है, ताकि वैश्विक नेतृत्व और आम जनमानस आने वाली चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें और पैनिक की स्थिति पैदा न हो।"
