निपाह वायरस से पहली मौत… नर्स की जिंदगी भी नहीं बचा सके डॉक्टर, राज्य में जारी हुआ अलर्ट
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 08:01 PM (IST)
नेशनल डेस्क : पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल से चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां 25 वर्षीय एक महिला नर्स की निपाह वायरस संक्रमण के बाद मौत हो गई। राज्य के हालिया इतिहास में यह निपाह से जुड़ी पहली मृत्यु बताई जा रही है, जिससे स्वास्थ्य महकमे में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, नर्स की स्थिति पिछले कुछ दिनों से बेहद नाजुक थी। भले ही हाल में उनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन शारीरिक हालत में सुधार नहीं हो सका। उन्हें लंबे समय तक क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में रखा गया था। हालत बिगड़ने पर बुधवार को वेंटिलेटर सपोर्ट पर शिफ्ट किया गया, जहां गुरुवार शाम करीब 4 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।
दो स्वास्थ्यकर्मी हुए थे संक्रमित
इसी अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ के दो सदस्यों में निपाह संक्रमण की पुष्टि हुई थी। दोनों को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया था। जनवरी में एक पुरुष नर्स पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गया, लेकिन महिला नर्स की हालत लगातार गंभीर बनी रही। निपाह वायरस व्यक्ति से व्यक्ति में फैलने की क्षमता रखता है, खासकर संक्रमित तरल पदार्थों के संपर्क से। संक्रमण की आशंका के बाद कई एशियाई देशों ने अतीत में हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ाई थी, क्योंकि यह वायरस सीमापार भी फैल सकता है।
जानवरों से इंसानों तक पहुंचता है संक्रमण
निपाह एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। फल खाने वाले चमगादड़ों को इसका मुख्य स्रोत माना जाता है। इनके लार, मल या पेशाब से दूषित खाद्य पदार्थ- खासकर खजूर का कच्चा रस- संक्रमण का माध्यम बन सकते हैं। सूअरों के जरिए भी इसके फैलने के मामले सामने आए हैं। संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से भी यह बीमारी आगे बढ़ सकती है, हालांकि यह कोविड-19 की तरह तेज़ी से नहीं फैलती। संक्रमण के लक्षण आमतौर पर 4 से 21 दिनों के भीतर दिखते हैं। शुरुआती संकेतों में बुखार, सिरदर्द और खांसी शामिल हैं, जो बाद में गंभीर निमोनिया या मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) का रूप ले सकते हैं।
उच्च मृत्यु दर और सीमित इलाज विकल्प
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, निपाह वायरस मस्तिष्क पर गहरा असर डालता है। गंभीर मामलों में मरीज को दौरे पड़ सकते हैं, कोमा की स्थिति बन सकती है और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक बताई जाती है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है। अभी तक इस वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में विकसित एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (m102.4) पर परीक्षण जारी है, जिससे भविष्य में उम्मीदें जुड़ी हैं।
रोकथाम ही सबसे बड़ा बचाव
निपाह का इलाज मुख्य रूप से सहायक चिकित्सा पर आधारित है- जैसे ऑक्सीजन सपोर्ट, वेंटिलेशन, तरल पदार्थ और दौरे नियंत्रित करने की दवाएं। कुछ एंटीवायरल दवाओं पर अध्ययन हुए हैं, लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं।
