बजट से पहले आई देश की आर्थिक कुंडली: वित्त मंत्री ने पेश किया Economic Survey 2025-26

punjabkesari.in Sunday, Feb 01, 2026 - 09:10 AM (IST)

Economic Survey 2025-26: केंद्रीय बजट पेश होने से ठीक एक दिन पहले गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) 2025-26 रखा। इस दस्तावेज़ को भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे विश्वसनीय 'सालाना रिपोर्ट कार्ड' माना जाता है। यह सर्वे न केवल पिछले एक साल के आर्थिक उतार-चढ़ाव का कच्चा-चिट्ठा पेश करता है बल्कि आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए एक दिशा-निर्देश (Roadmap) भी तैयार करता है। आइये आसान भाषा में समझते हैं कि इकोनॉमिक सर्वे आखिर क्या है और इसका हमारे जीवन पर क्या असर पड़ता है:

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey)?

इकोनॉमिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था की आधिकारिक वार्षिक समीक्षा है। इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की देखरेख में आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार किया जाता है।

  • बीते साल का लेखा-जोखा: यह बताता है कि पिछले 12 महीनों में भारत ने खेती, उद्योग, सेवा क्षेत्र और निर्यात में कैसा प्रदर्शन किया।

  • डेटा-बेस्ड रिपोर्ट: इसमें महंगाई दर (Inflation), जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth), और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े शामिल होते हैं।

  • नीतिगत रोडमैप: यह सरकार को सुझाव देता है कि किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है और भविष्य की चुनौतियां क्या हो सकती हैं।

बजट और इकोनॉमिक सर्वे का रिश्ता

भारत में बजट से पहले इकोनॉमिक सर्वे पेश करने की परंपरा दशकों पुरानी है। बजट में भविष्य की योजनाएं (जैसे टैक्स में बदलाव या नई योजनाएं) होती हैं लेकिन वे योजनाएं इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़ों पर आधारित होती हैं। यह जनता को बताता है कि सरकार ने पिछले बजट में किए गए वादों को कितना पूरा किया और देश का खजाना कितना मजबूत है।

इस बार के सर्वे में क्या खास है?

2025-26 का यह सर्वे विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक मंदी के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती (Resilience) को दर्शाता है। इसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) और रोजगार के नए अवसरों पर विशेष डेटा पेश किया गया है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट दी गई है।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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