कोविड के बाद रियल एस्टेट बूम, हाउसिंग फाइनेंस ने पकड़ी रफ्तारः Economic Survey

punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 06:11 PM (IST)

नई दिल्लीः देश में आवास वित्त का विस्तार लगातार बना हुआ है और मार्च, 2025 के अंत तक व्यक्तिगत आवास ऋणों की बकाया राशि लगभग चार गुना होकर 37 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। संसद में बृहस्पतिवार को पेश आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई। आर्थिक समीक्षा 2025-26 में बताया गया कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले आवास ऋणों की हिस्सेदारी 2024-25 में 11 प्रतिशत हो गई है, जो 2015 में आठ प्रतिशत थी। इसमें कहा गया कि कोविड-19 महामारी के बाद घरों की बिक्री में तेजी आई है, जिससे आवास ऋण की मांग को मजबूती मिली। 

समीक्षा में कहा गया कि पिछले एक दशक के दौरान ‘रियल एस्टेट और आवास स्वामित्व' क्षेत्र ने औसतन वार्षिक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में लगभग सात प्रतिशत का योगदान दिया है, जो सेवा-आधारित आर्थिक वृद्धि में इसकी अहम भूमिका और निर्माण व वित्तीय सेवाओं के साथ इसके मजबूत संबंधों को दर्शाता है। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, पिछले एक दशक में सरकार के नीतिगत सुधारों ने रियल एस्टेट क्षेत्र के औपचारिकीकरण को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत ब्याज सब्सिडी, किफायती आवास कोष, कम ब्याज दरें और सरल ऋण प्रक्रियाओं जैसे उपायों ने आवास की मांग बढ़ाने के साथ-साथ 'हाउसिंग फाइनेंस' तक पहुंच को मजबूत किया है। 

स्मार्ट सिटी मिशन और शहरी अवसंरचना विकास निधि (यूआईडीएफ) जैसी शहरी पहल से दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में घरों की मांग में वृद्धि हुई है। इन सुधारों के कारण कोविड-19 महामारी के बाद सितंबर, 2021 से रियल एस्टेट क्षेत्र एक सतत उछाल के दौर में प्रवेश कर गया। घरेलू बचत का अधिक हिस्सा भौतिक परिसंपत्तियों की ओर जाने से आवास बिक्री में सुधार हुआ है। हाल की तिमाहियों में भी बिक्री की यह गति बनी हुई है, जिसे अनुकूल किफायती परिस्थितियों और महंगाई में नरमी का समर्थन मिला है। 

रियल एस्टेट परामर्शदाता कंपनी 'प्रॉपटाइगर' के आंकड़ों का हवाला देते हुए समीक्षा में कहा गया कि औसत आवास बिक्री मात्रा वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 की तुलना में अब भी अधिक बनी हुई है। समीक्षा में कहा गया, ‘‘आवास ऋण में भी निरंतर विस्तार हुआ है। मार्च, 2025 के अंत तक व्यक्तिगत आवास ऋण 37 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गए हैं, जो मार्च 2015 के अंत में लगभग 10 लाख करोड़ रुपए थे। इससे जीडीपी में आवास ऋणों की हिस्सेदारी आठ प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो आवास मांग के गहरे वित्तीयकरण को दर्शाता है।'' 
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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