रायसीना डायलॉग में एस. जयशंकर ने भरी हुंकार, कहा— भारत की प्रगति में ही छिपा है हिंद महासागर का भविष्य
punjabkesari.in Saturday, Mar 07, 2026 - 04:47 PM (IST)
नेशनल डेस्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की बढ़ती शक्ति को पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया। नई दिल्ली में आयोजित 'रायसीना डायलॉग' के दौरान 'हार्ट ऑफ द सीज़: फ्यूचर ऑफ द इंडियन ओशन' विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत का विकास एक "बढ़ते ज्वार" (Lifting Tide) की तरह है, जिससे इस क्षेत्र के अन्य सभी देशों को लाभ होगा।
भारत का उत्थान अब कोई नहीं रोक सकता
सेशेल्स के विदेश मंत्री बैरी फॉरे और श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ की मौजूदगी में जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की प्रगति का रास्ता साफ है। उन्होंने कहा:"भारत का उत्थान स्वयं भारत द्वारा निर्धारित होगा। यह हमारी अपनी ताकत पर निर्भर करेगा, न कि दूसरों की गलतियों पर। जो देश हमारे साथ मिलकर काम करेंगे, उन्हें इस विकास का सीधा और अधिक लाभ मिलेगा।"

IMEC और INSTC होंगे क्नेक्टिविटी के नए गलियारे
विदेश मंत्री ने व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने के लिए भारत की प्रमुख पहलों का जिक्र किया। पूर्व की ओर म्यांमार के रास्ते दक्षिण-पूर्व एशिया तक कनेक्टिविटी, पश्चिम की ओर भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) के जरिए अरब प्रायद्वीप तक पहुंच और उत्तर की ओरअंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) के माध्यम से ईरान और यूरेशिया तक विस्तार शामिल है।

संकट में सबसे पहला मददगार रहा भारत
जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत केवल उपदेश नहीं देता, बल्कि जरूरत पड़ने पर संसाधनों के साथ खड़ा रहता है। उन्होंने दो प्रमुख उदाहरण दिए:
1. श्रीलंका आर्थिक संकट: जब पड़ोसी देश मुश्किल में था, तब भारत ने सबसे तेज़ और ठोस आर्थिक सहायता प्रदान की।
2. चक्रवात दितवा (Cyclone Ditwah): पिछले साल नवंबर में आए इस चक्रवात के बाद भारत की राहत टीम महज 24 घंटे के भीतर मदद के लिए पहुँच गई थी।

हिंद महासागर की पहचान केवल बातों से नहीं बनेगी
उन्होंने कहा कि अगर हमें 'हिंद महासागर की भावना या पहचान' विकसित करनी है, तो इसे केवल बयानों से नहीं बल्कि व्यावहारिक परियोजनाओं और ठोस प्रतिबद्धताओं से साबित करना होगा। लोग तभी गंभीरता से लेंगे जब उन्हें धरातल पर काम दिखेगा।
