'लोफ़र हैं हरियाणा के' गुफ़ा के अंदर बूम बॉक्स लेकर डांस करता दिखा युवकों का ग्रुप, लोगों ने जताया ऐतराज
punjabkesari.in Thursday, Aug 20, 2026 - 09:15 AM (IST)
देहरादून: देहरादून के 'रॉबर्स केव' में कुछ लोगों का एक ग्रुप बूम बॉक्स लेकर पहुंचा और तेज़ आवाज़ में हरियाणवी गाना बजाकर उसे अचानक डांस फ्लोर में बदल दिया। X पर शेयर किए गए एक वायरल वीडियो में, यह ग्रुप गुफ़ा के अंदर म्यूज़िक बजाते और डांस करते हुए आगे बढ़ता हुआ दिखाई दिया। वीडियो क्लिप में, एक आदमी ने अपने सिर पर बड़ा सा बूम बॉक्स रखा हुआ था और स्पीकर से हरियाणवी गाना 'लोफ़र' ज़ोर-ज़ोर से बज रहा था। बाकी लोग उसके साथ चल रहे थे, गाने के साथ गा रहे थे और गुफ़ा में आगे बढ़ते हुए डांस भी कर रहे थे। जिसे देख वहां के आसपास लोग काफी असहज हो गए और उनमें से एक ने X पर वीडियो शेयर कर इस पर आपत्ति जताई।
युवकों का ग्रुप अपनी परफ़ॉर्मेंस में पूरी तरह डूबा हुआ लग रहा था, कुछ लोग अपने हाथ ऊपर उठाकर ताल पर थिरक रहे थे, जबकि दूसरे लोग गाना गा रहे थे। गुफ़ा के कुदरती माहौल के बीच उनका तेज़ म्यूज़िक और डांस अलग ही दिख रहा था, और आस-पास मौजूद दूसरे सैलानी यह नज़ारा देख रहे थे। पर्यटक स्थल पर घूमते हुए ये लोग अपना यह जश्न मनाते रहे, जबकि आस-पास के सैलानी बस उन्हें और उनके मनोरंजन के इस अजीब तरीके को देखते रहे।
Someone ban these HR LOFARS from Uttarakhand pls. How do you even behave like this in public? This is stone age mentality. And listen to their songs... 'Lofar they Haryana ke'. They literally admitted themselves that they are lofars. Btw this was at Gucchupani, Dehradun. pic.twitter.com/M6R827v7wr
— Himalayan Hindu (@himalayanhindu) August 18, 2026
इस वीडियो को ग्रुप के व्यवहार की आलोचना के साथ शेयर किया गया। X पर वीडियो शेयर कर पोस्ट में लिखा, कोई प्लीज़ उत्तराखंड में इन HR (हरियाणा) के 'लोफ़रों' पर बैन लगाओ। लोग पब्लिक में ऐसा व्यवहार कैसे कर सकते हैं? यह तो पत्थर के ज़माने वाली सोच है। और उनके गाने तो सुनो... 'लोफ़र हैं हरियाणा के'। उन्होंने खुद ही मान लिया कि वे लोफ़र हैं। वैसे, यह देहरादून के गुच्चूपानी की घटना है।
इस क्लिप ने पर्यटकों के व्यवहार और सार्वजनिक शिष्टाचार पर एक बड़ी बहस छेड़ दी। कुछ देखने वालों ने न सिर्फ़ तेज़ म्यूज़िक पर ध्यान दिया, बल्कि बज रहे गाने के बोल पर भी गौर किया। उनका तर्क था कि कुछ हरियाणवी गाने हिंसा और अपराध को बढ़ावा देते हैं और युवा सुनने वालों पर बुरा असर डाल सकते हैं।
दूसरों का कहना था कि पर्यटकों के मज़े करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन सार्वजनिक जगह पर तेज़ म्यूज़िक बजाना और ज़ोर-ज़ोर से डांस करना तब हद पार कर देता है जब इससे दूसरे सैलानियों को परेशानी हो।
एक व्यक्ति ने कहा कि सरकार को पर्यटकों के लिए शिष्टाचार के साफ़ नियम बनाने चाहिए, ताकि लोग दूसरों के लिए परेशानी का कारण बने बिना सार्वजनिक पर्यटक स्थलों का आनंद ले सकें।
