Copper: तांबे की कीमतों में अब तक 40% तक उछाल, आगे और तेजी के संकेत, निवेश का सुनहरा मौका
punjabkesari.in Thursday, Feb 19, 2026 - 12:04 PM (IST)
नेशनल डेस्कः वैश्विक बाजार में तांबे की कीमतों में करीब 40% उछाल से भारतीय मेटल सेक्टर में तेजी देखी जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों, डेटा सेंटर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग से कॉपर की खपत बढ़ने की उम्मीद है। ICRA ने अगले दो वर्षों में भारत में 10-12% वार्षिक मांग वृद्धि का अनुमान जताया है। Hindustan Copper, Hindalco और Vedanta जैसी कंपनियां इस तेजी का प्रमुख लाभ उठा सकती हैं।
हिंदुस्तान कॉपर
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी Hindustan Copper Ltd देश की एकमात्र वर्टिकली इंटीग्रेटेड कॉपर उत्पादक है, जो खनन से लेकर रिफाइनिंग तक की पूरी प्रक्रिया खुद संभालती है। कंपनी ने उत्पादन क्षमता को मौजूदा 3.54 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2031 तक 12.2 मिलियन टन प्रति वर्ष करने की योजना बनाई है। इसके प्रमुख प्रोजेक्ट्स मध्य प्रदेश के मालांजखंड और राजस्थान के खेतड़ी में संचालित हैं। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। सालाना आधार पर रेवेन्यू 109 प्रतिशत बढ़कर 687 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 328 करोड़ रुपये था। शुद्ध मुनाफा भी 147 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 156 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
Hindalco Industries
आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख कंपनी Hindalco Industries Ltd कॉपर और एल्युमीनियम दोनों क्षेत्रों में सक्रिय है। इसकी अमेरिकी सहायक कंपनी Novelis ने शिपमेंट में वृद्धि दर्ज की है। तीसरी तिमाही में कंपनी का कुल रेवेन्यू 14 प्रतिशत बढ़कर 66,521 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, लाभ के मोर्चे पर दबाव देखने को मिला। सालाना आधार पर शुद्ध मुनाफा 45 प्रतिशत घटकर 2,049 करोड़ रुपये रह गया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
Vedanta
अनिल अग्रवाल की कंपनी Vedanta Ltd ने तिमाही नतीजों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। कॉपर डिवीजन ने तीसरी तिमाही में 45 किलो टन कैथोड का उत्पादन किया। कंपनी का रेवेन्यू 37 प्रतिशत बढ़कर 23,369 करोड़ रुपये हो गया। सबसे उल्लेखनीय बात शुद्ध मुनाफे में उछाल रही। यह 60 प्रतिशत बढ़कर 7,807 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। तिमाही आधार पर भी मुनाफे में 124 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
मांग में तेजी
ICRA के मुताबिक, भारत में तेजी से बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती बिक्री कॉपर की खपत को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। हालांकि, घरेलू उत्पादन अभी मांग के अनुरूप नहीं है, जिससे आयात पर निर्भरता बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर कॉपर कंसंट्रेट की कमी के कारण रिफाइनिंग चार्ज में गिरावट आई है, जिससे स्मेल्टिंग कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। इसके बावजूद, औद्योगीकरण और बिजलीकरण की तेज रफ्तार को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में कॉपर सेक्टर की चमक बरकरार रहने की पूरी संभावना है।
