बाबा वेंगा की खतरनाक चेतावनी: क्या कागज के नोट हो जाएंगे बेकार? सोने-चांदी की बेतहाशा तेजी ने दुनिया को चौंकाया

punjabkesari.in Monday, Feb 09, 2026 - 03:01 PM (IST)

नेशनल डेस्क: भविष्यवाणियों की दुनिया में जब भी कोई बड़ा उलटफेर होता है, तो बुल्गारिया की बाबा वेंगा का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। साल 2026 में एक बार फिर उनकी एक पुरानी बात सोशल मीडिया से लेकर निवेशकों के गलियारों तक गूंज रही है। कहा जा रहा है कि बाबा वेंगा ने बहुत पहले ही एक ऐसे दौर की ओर इशारा कर दिया था, जहां दुनिया का कागजी मुद्रा (Currency) से भरोसा उठ जाएगा और लोग अपनी जमापूंजी बचाने के लिए धातुओं की शरण में जाएंगे। वर्तमान में सोने और चांदी की कीमतों में जिस तरह का उबाल आया है, उसने इस चर्चा को और भी हवा दे दी है।

आसमान की ओर भागती कीमतें: क्या सच हो रहा है डर?
बाजार की मौजूदा स्थिति किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग रही है। जिस सोने को कभी सुरक्षित निवेश माना जाता था, वह अब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार कर चुका है। चांदी ने तो और भी ज्यादा रफ्तार पकड़ी है और ₹2.44 लाख प्रति किलो के स्तर को छूकर सबको हैरान कर दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं, औद्योगिक जगत में काम आने वाला तांबा (Copper) भी ₹1,200 प्रति किलो के ऊपर कारोबार कर रहा है। इन बढ़ते भावों को देखकर आम आदमी और निवेशक यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या सोने के लिए ₹1.60 लाख का आंकड़ा भी सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं।

भविष्यवाणी का तर्क या आर्थिक संकट की आहट?
बाबा वेंगा के समर्थकों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक ऐसे वित्तीय भंवर (Financial Crisis) में फंस सकती है, जहाँ नकदी की वैल्यू कम हो जाएगी। ऐसी स्थिति में सोना, चांदी और तांबा जैसे 'सेफ हेवन एसेट्स' ही लोगों की पहली पसंद बनेंगे। हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू भी है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तेजी के पीछे ग्रहों की चाल या भविष्यवाणियां नहीं, बल्कि दुनिया भर में चल रहे युद्ध, देशों के बीच तनाव और बढ़ती औद्योगिक मांग जैसे ठोस कारण हैं। उनका मानना है कि बाजार अपनी चाल से चलता है, लेकिन फिर भी बाबा वेंगा के दावों और मौजूदा महंगाई के मेल ने लोगों के मन में खौफ और जिज्ञासा दोनों पैदा कर दी है।

 


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Content Editor

Anu Malhotra

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