सरकार के ''नापाक'' मंसूबों की हार संविधान और लोकतंत्र की जीत हुई: जयराम रमेश

punjabkesari.in Monday, Apr 20, 2026 - 02:27 PM (IST)

नई दिल्ली: कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में मोदी सरकार द्वारा उठाए गए परिसीमन के कदम को नाकाम करना 'बुलडोजर राजनीति' की हार है और यह पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए कि केंद्र सरकार का एजेंडा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संरक्षण है। मुख्य विपक्षी दल ने यह भी मांग की कि कि केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र या मई के अंत में एक विधेयक लाकर मौजूदा लोकसभा सीटों के आधार पर महिला आरक्षण को तत्काल लागू करे। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर महिलाएं 'भाजपा के प्रचार' के झांसे में नहीं आएंगी, क्योंकि वे जानती हैं कि सत्तारूढ़ दल उनके नाम पर अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहता है। 

रमेश का कहना है कि महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन को आगे बढ़ाने के सरकार के 'नापाक' मंसूबों की हार संविधान और लोकतंत्र की जीत है। रमेश ने कहा, यह बुलडोजर की राजनीति और जल्दबाज़ी में परिसीमन के प्रयासों की हार है। यह विधेयक महिला आरक्षण के बारे में नहीं है, बल्कि धोखे से परिसीमन को आगे बढ़ाने के बारे में है।' उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की इस मांग को अनसुना कर दिया गया कि इसे 2024 के आम चुनाव से लागू किया जाए। 

कांग्रेस नेता का कहना है, ''अचानक, 16 अप्रैल की रात को अधिनियम अधिसूचित किया गया। यह विधानसभाओं में महिला आरक्षण के बारे में भाजपा की गंभीरता को दर्शाता है। वे 30 महीने तक सोते रहे।'' रमेश ने इस बात का उल्लेख किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में आश्वासन दे रहे थे कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा और सीटें इस तरह बढ़ाई जाएंगी कि अनुपात बना रहे। उन्होंने सवाल किया कि यह विधेयक का हिस्सा क्यों नहीं है? कांग्रेस नेता ने दावा किया, ''मुद्दा महिला आरक्षण नहीं बल्कि मोदी का संरक्षण करना है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जातीय जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है। 

रमेश ने कहा, हम लोकसभा की मौजूदा संख्या के आधार पर विधायिकाओं में महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग करते हैं। सरकार अगर इससे पहले ऐसा करना चाहती है तो उसे मानसून सत्र के दौरान या मई के अंत में एक संशोधन विधेयक लाना होगा। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े।

 लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन इन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।  


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Content Editor

Anu Malhotra

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