कांग्रेस ने एआई सम्मेलन में न सिर्फ कपड़े उतारे बल्कि अपना बौद्धिक दिवालियापन भी उजागर किया : मोदी

punjabkesari.in Saturday, Feb 28, 2026 - 12:33 AM (IST)

नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'एआई इम्पैक्ट' शिखर सम्मेलन में कांग्रेस की युवा इकाई के सदस्यों द्वारा 'कमीज उतारकर किये गए प्रदर्शन' की शुक्रवार को कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि विपक्षी पार्टी ''चाहे जितने कपड़े फाड़ना चाहती है, फाड़ सकती है'' लेकिन उनकी सरकार देश के विकास के लिए काम करना जारी रखेगी। मोदी ने 'न्यूज18 राइजिंग भारत समिट' को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने न सिर्फ विदेशी मेहमानों के सामने अपने कपड़े उतारे बल्कि अपना बौद्धिक दिवालियापन भी उजागर किया। उन्होंने रेखांकित किया कि 'मिलेनियल' पीढ़ी (1981-1996 में जन्मे लोग) ने देश की सबसे पुरानी पार्टी को सबक सिखा दिया है और अब 'जेन-जेड' (1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग) भी ऐसा ही करने के लिए तैयार है।

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष नए संसद भवन के ऊपर स्थापित 'बब्बर शेरों' की प्रतिमा को देखकर नाखुश है, लेकिन उनके अपने 'बब्बर शेर' आम जनता के 'जूतों' का सामना करने के बाद भाग रहे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 24 फरवरी को कहा था कि उन्हें भारतीय युवा कांग्रेस के 'बब्बर शेरों' पर गर्व है जिन्होंने एआई शिखर सम्मेलन में ''निडरता से'' अपनी आवाज उठाई। मोदी ने कहा, ''कांग्रेस के बब्बर शेर लोगों के जूते खाकर भाग गए।''

प्रधानमंत्री ने 'एआई इम्पैक्ट' सम्मेलन में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कुछ लोगों द्वारा रोके जाने की ओर इशारा करते हुए यह कहा। भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने 20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट स्थल के हॉल नंबर पांच के अंदर सरकार विरोधी नारों से छपी टी-शर्ट को प्रदर्शित करते हुए अपनी कमीजें उतारकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई। मोदी ने अपने 45 मिनट के भाषण में कहा, ''कांग्रेस चाहे जितने कपड़े फाड़ ले, लेकिन हम भारत के विकास के लिए काम करते रहेंगे। कांग्रेस ने एआई सम्मेलन में न सिर्फ अपने कपड़े उतारे, बल्कि विदेशी मेहमानों के सामने अपनी अक्षमताएं भी उजागर कर दीं।'' उन्होंने कहा कि एआई शिखर सम्मेलन पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था, लेकिन दुर्भाग्य से, कांग्रेस ने इस राष्ट्रीय उत्सव को धूमिल करने का प्रयास किया।

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए हमेशा महात्मा गांधी का सहारा लेती है, लेकिन किसी भी अच्छे काम का श्रेय एक ही परिवार को देने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा, ''हमारे देश की जनता ने सरकार द्वारा उठाए गए हर अच्छे कदम का स्वागत किया लेकिन कांग्रेस को तो सिर्फ हर चीज का विरोध करना आता है। कांग्रेस के वोट चोरी नहीं होते; बल्कि लोग कांग्रेस को अपने वोट के लायक नहीं समझते। सबसे पहले 'मिलेनियल' ने कांग्रेस को सबक सिखाया, अब 'जेन जेड' भी ऐसा ही करने को तैयार है।'' मोदी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार के हर कदम का केवल विरोध करना नहीं है, बल्कि एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है और यही कारण है कि देश की ''प्रबुद्ध जनता'' अब कांग्रेस को ''सबक सिखा रही है।'' उन्होंने कहा कि 1984 में कांग्रेस को 39 प्रतिशत वोट और 400 से अधिक सीट मिलीं लेकिन बाद के चुनावों में उसके वोट में लगातार गिरावट आई।

मोदी ने कहा, ''आज कांग्रेस की हालत ऐसी है कि उसके पास सिर्फ चार राज्यों में 50 से अधिक विधायक हैं। पिछले 40 वर्ष में देश में युवा मतदाताओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन कांग्रेस की लोकप्रियता में स्पष्ट रूप से गिरावट आई है।'' हाल में भारत द्वारा दूसरे देशों के साथ किए गए व्यापार समझौतों पर मोदी ने कहा कि देश ने अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचान लिया है और अपने संस्थानों को मजबूत किया है, जिसने विकसित देशों को आगे आकर भारत के साथ समझौते करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद भी, कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिए औपनिवेशिक मानसिकता को बरकरार रखा। उन्होंने कहा, ''यदि हमने अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचान कर अपने संस्थानों को मजबूत न किया होता, तो कोई भी देश हमारे साथ व्यापार समझौते नहीं करता। इसी कारण विकसित देश भारत के साथ व्यापार समझौते करने के लिए आगे आए हैं।''

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी देश में क्षमता अचानक नहीं आती बल्कि यह पीढ़ियों से निर्मित होती है और ज्ञान, परंपरा, कड़ी मेहनत और अनुभव द्वारा निखरती है। मोदी ने कहा कि इतिहास के लंबे कालखंड में, सदियों की गुलामी ने देश की क्षमता के प्रति हीनता की भावना को भर दिया था, और अन्य देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में इस धारणा को गहराई से बैठा दिया था कि भारतीय अशिक्षित और अधीन हैं। उन्होंने कहा, ''अगर देश अब भी 2014 से पहले के युग की निराशा में डूबा हुआ होता, 'कमजोर पांच' देशों में गिना जाता और नीतिगत गतिरोध से ग्रस्त होता, तो हमारे साथ व्यापार समझौता कौन करता?'' मोदी ने कहा, ''पिछले 11 वर्ष में, देश की चेतना में ऊर्जा का एक नया प्रवाह प्रवाहित हुआ है। भारत अब अपनी खोई हुई क्षमता को पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है।''

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार द्वारा शुरू किए गए हाल के सुधारों की श्रृंखला के कारण, दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अब भारत के साथ व्यापार समझौते करने के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "एक समय था जब भारत नयी प्रौद्योगिकी का सिर्फ उपभोक्ता था। लेकिन अब हम न केवल उनका विकास कर रहे हैं, बल्कि उनके मानक भी तय कर रहे हैं।" मोदी ने कहा कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना आज वैश्विक चर्चा का विषय बन गयी है और भारत द्वारा उठाया गया हर कदम दुनिया भर में बारीकी से देखा जाता है और उसका विश्लेषण किया जाता है। उन्होंने कहा, ''एआई शिखर सम्मेलन इसका एक स्पष्ट उदाहरण था।'' उन्होंने कहा कि सरकार का '2047 तक विकसित भारत' का नारा कोई राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाकर पिछली कांग्रेस सरकारों की गलतियों को सुधारने का एक प्रयास है।

मोदी ने कहा कि दुनिया इस बात से चकित है कि भारत में 2014 तक लगभग तीन करोड़ परिवार अंधेरे में रहते थे, लेकिन अब वह सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में शीर्ष देशों में से एक बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत, जिसके कई शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार की कोई उम्मीद नहीं थी, अब दुनिया के तीसरे सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क वाला देश बन गया है। उन्होंने कहा, ''भारतीय रेलवे को केवल लगातार देरी और धीमी गति के लिए जाना जाता था, लेकिन वंदे भारत और नमो भारत जैसी अर्ध-उच्च गति कनेक्टिविटी अब संभव हो पाई है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण कभी अल्पकालिक सोच से नहीं होता बल्कि यह दीर्घकालिक दृष्टिकोण, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से आकार लेता है। 


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News Editor

Parveen Kumar

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