डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती पर PM मोदी, CM योगी सहित देश कई नेताओं ने किया नमन, कहा- अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संकल्प हैं

punjabkesari.in Tuesday, Apr 14, 2026 - 01:57 PM (IST)

नेशनल डेस्क: देश के प्रधान मंत्री पीएम मोदी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। पीएम नरेंद्र मोदी ने बाबा साहेब अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए एक्स पर एक पुराने थ्रोबैक वीडियो को शेयर किया। इसमें पीएम मोदी यह कहते दिख रहे हैं कि आज का दिन देश के इतिहास का बहुत बड़ा दिन है। पीएम मोदी ने कहा कि अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संकल्प हैं। बाबा साहेब ने अपने जीवन को संघर्ष से जोड़ा और समाज की बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़े।

 

इसी कड़ी में सीएम योगी ने उनका जीवन सभी के लिए सदैव पथप्रदर्शक रहेगा। आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, ''समता, न्याय और बंधुत्व के उच्च आदर्शों से आलोकित, समरस एवं समावेशी समाज की आधारशिला रखने वाले भारतीय संविधान के शिल्पकार 'भारत रत्न' बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।'' उन्होंने कहा, ''अंत्योदय और लोक-कल्याण के प्रति समर्पित बाबा साहेब सच्चे अर्थों में मां भारती के अमूल्य रत्न हैं। उनका प्रेरक जीवन हम सभी के लिए सदैव पथप्रदर्शक रहेगा।  

संविधान निर्माता, समाज सुधारक
डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर, जिन्हें “बाबा साहेब” के नाम से जाना जाता है, भारत के महान संविधान निर्माता, समाज सुधारक और दलितों के अधिकारों के अग्रदूत थे। उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू (अब डॉ. अंबेडकर नगर) में हुआ था। वे एक दलित परिवार से थे और बचपन से ही उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।

राजनीतिक और आर्थिक अधिकार के लिए आवाज उठाई 
अंबेडकर ने प्रारंभिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए विदेश का रुख किया। उन्होंने Columbia University (अमेरिका) और London School of Economics (इंग्लैंड) से अर्थशास्त्र और कानून की पढ़ाई की। वे अपने समय के सबसे शिक्षित भारतीयों में से एक थे। भारत लौटने के बाद उन्होंने समाज में फैली जाति प्रथा और छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने दलितों को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकार दिलाने के लिए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। उनका मानना था कि शिक्षा, संगठन और संघर्ष ही समाज में समानता लाने का मार्ग है।

महिलाओं के अधिकारों के लिए डॉक्टर अंबेडकर का महत्वपूर्ण योगदान
स्वतंत्र भारत के निर्माण में अंबेडकर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्हें भारतीय संविधान की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने संविधान में समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांतों को शामिल किया, जिससे हर नागरिक को समान अधिकार मिल सके। अंबेडकर ने महिलाओं के अधिकारों, श्रमिकों की स्थिति और सामाजिक न्याय के लिए भी  दिया। जीवन के अंतिम चरण में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया और लाखों अनुयायियों को भी इस मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

6 दिसंबर 1956 को हुआ निधन
6 दिसंबर 1956 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके विचार आज भी समाज को दिशा देते हैं। बाबा साहेब अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता की मिसाल है, जो हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।
 


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Content Writer

Ramkesh

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