फर्जी और अनजान कॉल से मिलेगी राहत: सरकार का बड़ा फैसला, 1 नवंबर से स्क्रीन पर दिखेगा कॉलर का असली नाम
punjabkesari.in Thursday, Oct 15, 2026 - 11:27 AM (IST)
नई दिल्ली: अगर आप भी अनजान नंबरों और फर्जी कॉल्स से परेशान हैं, तो आपके लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। जल्द ही आपके फोन की स्क्रीन पर अनजान नंबर से आने वाली कॉल के साथ उस व्यक्ति का असली नाम भी लिखा हुआ दिखाई देगा।
भारत सरकार ने यूज़र्स के लिए कॉलर ID अनिवार्य कर दी है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स (TSPs) को 1 नवंबर 2026 से 'कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन' (CNAP) लागू करने का निर्देश दिया है। CNAP भारत का एक वेरिफाइड कॉलर आइडेंटिफिकेशन सिस्टम है, जो कॉल करने वाले का नंबर और नाम दिखा सकता है।
क्या है CNAP और यह कैसे काम करेगा?
DoT के आदेश के अनुसार, 4G और उससे अगली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क (जैसे 5G) पर सभी यूज़र्स के लिए CNAP डिफ़ॉल्ट रूप से इनेबल रहेगा। जब आपको कोई कॉल आएगी, तो CNAP कॉल करने वाले का नाम और नंबर दिखाएगा। आदेश में कहा गया है कि 2G और 3G नेटवर्क तथा पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क (PSTN) पर इसे लागू करने के बारे में अलग से विचार किया जाएगा।
आदेश के मुताबिक, जब कोई कॉल आएगी, तो स्क्रीन पर सबसे पहले कॉल करने वाले का नंबर दिखेगा। दूसरी जगह पर वह नाम दिखाई देगा जो रिसीवर के कॉन्टैक्ट्स में सेव है। अगर नंबर सेव नहीं है, तो घरेलू कॉल (domestic calls) के मामले में, कॉल करने वाले का वह नाम दिखाया जाएगा जो टेलीकॉम ऑपरेटर के सब्सक्राइबर डेटाबेस में दर्ज है। इंटरनेशनल कॉल के मामले में, स्क्रीन पर "इंटरनेशनल कॉल" लिखा हुआ दिखाई देगा।
हर टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर को एक ऐसा डेटाबेस बनाना होगा, उसे चलाना होगा और मेंटेन करना होगा, जिसमें सब्सक्राइबर्स के नाम उनके नंबरों के साथ जुड़े हों। कॉल प्राप्त करने वाला ऑपरेटर इस डेटाबेस से नाम निकालेगा और उसे कॉल पाने वाले यूज़र को दिखाएगा।
ऑपरेटर्स को 'सिक्योरिटी-बाय-डिजाइन' (शुरुआत से ही सुरक्षा को ध्यान में रखने वाले) दृष्टिकोण का पालन करना होगा। इसके तहत, इनकमिंग कॉल खत्म होने के बाद 'क्वेरी-रिस्पॉन्स' मैकेनिज्म के जरिए कॉलर का नाम सेव करके नहीं रखा जा सकेगा। जिन यूजर्स ने 'कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन रिस्ट्रिक्शन' (CLIR) सुविधा ले रखी है, उनका नाम नहीं दिखाया जाएगा।
बिजनेस और बल्क कनेक्शन के लिए, ऑपरेटर्स सब्सक्राइबर रिकॉर्ड में दर्ज नाम के बजाय कोई दूसरा (पसंदीदा) नाम दिखाने का विकल्प दे सकते हैं। यह नाम या तो 'ट्रेड मार्क्स रजिस्ट्री' में यूजर के नाम पर रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क होना चाहिए, या फिर 'गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स' (GST) पोर्टल पर रजिस्टर्ड ट्रेड नेम होना चाहिए। ऑपरेटर्स को इस नाम और इससे जुड़े दस्तावेजों का वेरिफिकेशन करना होगा। मौजूदा सब्सक्राइबर्स को अपना पसंदीदा नाम अपडेट कराने के लिए आवेदन करना होगा।
यह आदेश पिछले कुछ महीनों में 4G और 5G नेटवर्क पर किए गए ट्रायल के बाद आया है। इसमें 'टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (TRAI) की फरवरी 2024 की सिफारिशों का भी जिक्र है। अक्टूबर 2025 में, TRAI ने DoT (दूरसंचार विभाग) के उस प्रस्ताव पर सहमति जताई, जिसके तहत CNAP (कॉलर नेम प्रेजेंटेशन) को डिफ़ॉल्ट रूप से उपलब्ध कराया जाएगा, हालांकि, TRAI की शुरुआती सिफारिश में इसे केवल अनुरोध करने पर ही एक्टिवेट करने का सुझाव दिया गया था।
