शिक्षा या व्यापार? चौथी क्लास की 4 किताबों का बिल ₹3298, वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
punjabkesari.in Thursday, Apr 02, 2026 - 01:52 PM (IST)
नेशनल डेस्क: वर्तमान दौर में निजी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करना आम आदमी के बजट से बाहर होता जा रहा है। हाल ही में एक अभिभावक द्वारा साझा किए गए चौथी कक्षा की किताबों और कॉपियों के बिल ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। यह वायरल पोस्ट न केवल शिक्षा की बढ़ती लागत को उजागर करता है, बल्कि उस 'कॉरपोरेट मॉडल' पर भी सवाल उठाता है जिसने बुनियादी जरूरत को एक विलासिता (Luxury) बना दिया है।
मात्र 4 किताब और 8 कॉपियां: ₹3,298 का बिल
वायरल जानकारी के अनुसार, चौथी कक्षा के एक बच्चे के लिए मात्र 4 किताबों और 8 कॉपियों की कीमत ₹3,298 तक पहुंच गई है। अभिभावकों का कहना है कि यदि किताबों का खर्च इतना है, तो मासिक फीस, ड्रेस, ट्रांसपोर्ट और अन्य वार्षिक खर्चों को मिलाकर एक बच्चे को पढ़ाना किसी चुनौती से कम नहीं है। अनुमान के मुताबिक, ऐसे स्कूलों की फीस ₹12,000 से ₹15,000 प्रति माह के बीच होती है।
शिक्षा इतनी ज्यादा महंगी हो गई हैं!!
— Manju (@cop_manjumeena) March 27, 2026
आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हो कक्षा 4 की मात्र 4 बुक की कीमत 3 298 रूपये है जबकि पहले स्नातक की फीस ही 2000 हजार से 2500 तक होती थी
आज के समय गरीब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा चाहकर नहीं दे सकता है !
शिक्षा आपकल व्यापार और स्कूल… pic.twitter.com/IC0kduJA1t
बदलता सिलेबस: पुरानी किताबों का चलन हुआ खत्म
अभिभावकों ने उस दौर को याद किया जब एक छात्र के पास होने के बाद उसकी किताबें जूनियर छात्र इस्तेमाल कर लिया करते थे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। निजी स्कूल लगभग हर साल पब्लिशर या सिलेबस बदल देते हैं, जिससे पुरानी किताबों का पुन: उपयोग असंभव हो जाता है। माता-पिता को हर साल नई और महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
डिजिटल प्रतिक्रियाएं: क्या शिक्षा अब सिर्फ व्यापार है?
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। कई यूजर्स ने सरकार से निजी स्कूलों की मनमानी और किताबों की कीमतों पर लगाम लगाने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'शिक्षा का अधिकार' (RTE) कागजों पर तो मौजूद है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसकी "कीमत" आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है।
