See More

शांति प्रक्रिया के बीच चीनी राजदूत बोले- संदेह नहीं विश्वास बनाए रखने की जरूरत

2020-07-10T19:15:45.263

नई दिल्लीः भारत में चीनी राजदूत सून वेदोंग ने कहा है कि चीन और भारत सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति नहीं चाहते हैं और दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय एक दूसरे का सहयोगी बनना चाहिए। वेदोंग ने चीन-भारत संबंधों पर शुक्रवार को जारी वीडियो में कहा कि लद्दाख की गलवान घाटी में चीन-भारत सीमा पर 15 जून को जो कुछ भी हुआ था वैसी स्थति भारत और चीन देखना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पांच जुलाई को चीनी विदेश मंत्री वांग यी और भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच फोन पर बातचीत हुई और इस दौरान दोनों के बीच सीमा पर तनाव को कम करने को लेकर सकारात्मक सहमति बनी।
PunjabKesari
चीनी राजदूत ने कहा, ‘‘वर्तमान में हमारे सैनिक, सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत के दौरान बनी आम सहमति के आधार पर क्षेत्र में तैनात हैं।'' वेदोंग ने कहा कि गलवान घाटी में हाल में जो कुछ हुआ उसके कारण भारत में कुछ लोग चीन और भारतीय नेताओं के बीच बनी आम सहमति पर संदेह जता रहे हैं और चीन-भारत के संबंधों को लेकर गलत धारणा बना रहे हैं। इन सब चीजों के कारण दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में व्यवधान आया है। उन्होंने कहा, ‘‘इस मामले में, मुझे लगता है कि दोनों देशों के संबंधों के कुछ मूलभूत बिंदुओं को स्पष्ट करना अनिवार्य हो गया है।''
PunjabKesari
चीनी राजदूत ने कहा, ‘‘चीन और भारत को प्रतिद्वंद्वी के बजाय एक दूसरे का सहयोगी बनना चाहिए। चीन और भारत के बीच 2,000 से अधिक वर्षों का दोस्ताना संबंध रहा है। दोनों के बीच अधिकतर समय संबंध मित्रतापूर्ण ही रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘चीन और भारत को टकराव के स्थान पर शांति की जरूरत है। सहयोग से दोनों को लाभ होता है जबकि टकराव से किसी को नहीं। हमें अपने मतभेदों को अपने द्विपक्षीय संबंधों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।''
PunjabKesari
वेदोंग ने कहा, ‘‘चीन और भारत को एक दूसरे पर संदेह करने के बजाय एक दूसरे के बीच विश्वास का निर्माण करने की जरूरत है और दोनों देशों के संबंधों को पीछे ले जाने के बजाय आगे बढ़ाना चाहिए।''

 


Yaspal

Related News