दिवाली पर छाया अंधेरा: सिर्फ ₹200 की कार्बाइड गन ने मचाया हाहाकार, 125 से ज़्यादा लोगों की गई आंखों की रोशनी

punjabkesari.in Wednesday, Oct 22, 2025 - 11:37 AM (IST)

नेशनल डेस्क। दिवाली के मौके पर मनोरंजन का एक सस्ता और खतरनाक जुगाड़ इस बार कई लोगों के लिए जीवन भर का अंधेरा बन गया है। बाज़ार में केवल ₹150 से ₹200 में मिलने वाली 'कैल्शियम कार्बाइड गन' के कारण भोपाल में अब तक 125 से अधिक लोगों की आंखों की रोशनी दांव पर लग गई है। अस्पतालों के अनुसार इसकी चपेट में आने वालों में ज़्यादातर 8 से 14 साल के बच्चे हैं और कुछ गंभीर मामलों में कॉर्निया ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ गई है।

कैसे काम करती है कार्बाइड गन?

यह तथाकथित गन वास्तव में एक देसी जुगाड़ है जिसे गैस लाइटर, प्लास्टिक पाइप और आसानी से उपलब्ध कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग करके बनाया जाता है। जब गन में भरा कैल्शियम कार्बाइड पानी के संपर्क में आता है तो यह अत्यधिक ज्वलनशील एसिटिलीन गैस बनाता है। एक छोटी सी चिंगारी मिलते ही यह गैस तेज विस्फोट करती है।

PunjabKesari

इस अनियंत्रित विस्फोट प्रक्रिया के दौरान प्लास्टिक पाइप के टूटने पर निकलने वाले छोटे-छोटे टुकड़े छर्रों की तरह शरीर में घुसकर गंभीर चोट पहुंचाते हैं खासकर आंखों में। कई बार बच्चे उत्सुकता में झांकते हैं और उसी समय धमाका हो जाता है जिससे आंखें, चेहरे और कॉर्निया को गहरा नुकसान पहुंचता है।

यह भी पढ़ें: Bollywood और Music Industry में फिर छाया मातम, यह मशहूर सिंगर दुनिया को कह गया अलविदा

डॉक्टरों का अलर्ट: स्थायी अंधापन का खतरा

हमीदिया अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अदिति दुबे ने बताया कि उनके पास आए ज़्यादातर मामले कार्बाइड वाले पटाखे के ही हैं जिनमें कॉर्निया इंजरी हुई है। बारूद और कार्बाइड के कण आंख में जाने से आंख का काला मोतिया (Cornea) सफेद पड़ रहा है।

PunjabKesari

ट्रांसप्लांट: दो बच्चों के लिए एंब्रायोटिक मेम्ब्रेन ट्रांसप्लांट (Embryotic Membrane Transplant) की व्यवस्था की जा रही है। यह जले हुए या गंभीर सूजन वाली आंखों की सतह पर झिल्ली लगाकर इलाज करने की सर्जिकल प्रक्रिया है।

स्थायी नुकसान: डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह छोटा बम है जिसके फटने से न केवल आंख बल्कि दिमाग और नर्वस सिस्टम को भी खतरा रहता है। लंबे संपर्क से ऑक्सीजन की कमी, ब्रेन एडिमा और न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें हो सकती हैं। गंभीर मामलों में ऑप्टिक नर्व की चोट और रेटिना सूजन के कारण स्थायी अंधापन तक हो सकता है। फिलहाल तीन मरीज़ों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Rohini Oberoi

Related News