क्या इंसानों के बीच महामारी का रूप धारण कर सकता है बर्ड फ्लू?

2021-01-13T11:07:00.163

जालंधर (सूरज ठाकुर): साल 2006 के बाद ऐसे कई शोध सामने आए हैं जिनसे पता चलता है कि बर्ड फ्लू (एच5एन1 वायरस) की मानव से मानव शरीर में फैलने की भी संभावनाएं हैं। शोधकर्ताओं 2012 में साबित किया है कि बर्ड फ्लू वायरस हवा के जरिए फैल सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक अमरीकी एजेंसी ने शोध के कुछ हिस्सों को प्रकाशित करने से रोकने की भी कोशिश की थी, लेकिन वह नाकाम रही थी। एजेंसी को आशंका थी कि शोध का इस्तेमाल आतंकी जैविक हथियार बनाने में कर सकते हैं।

 

इसलिए मानव शरीर में नहीं फैल पाया बर्ड फ्लू
देश के आठ राज्यों बर्ड फ्लू अपने पांव पसार चुका है। भारत सरकार बर्ड फ्लू के लिए 2015 में तैयार किए गए एक्शन प्लान के तहत ही कार्य कर रही है। सर्दियों के दिनों जब अचानक वन्य पक्षियों या पोल्ट्री में मुर्गे मुर्गियों की मौत होने लगती है तो उनके सैंपल भोपाल स्थित लैब में भेजे जाते हैं। इसके बाद उनमें यदि बर्ड फ्लू की पुष्टि हो जाती है तो वन्य या जलचर पक्षियों सहित पोल्ट्री फार्म के मुर्गे और मुर्गियों को लाखों की तादाद में मार कर दफना दिया जाता है। यही वजह है कि पक्षियों से पक्षियों में ही फैलने वाली बीमारी अभी तक आसानी से मानव शरीर तक नहीं पहुंच पाई है।

 

बर्ड फ्लू का वायरस बदल सकता है अपना रूप
वर्ष 1997 में हांगकांग में मानव शरीर में बर्ड फ्लू का पहला मामला आने के बाद वैज्ञानिक लगातार इस बीमारी पर शोध करते रहे हैं। उनके शोध भविष्य में गंभीर परिणामों को भुगतने की चेतावनी भी देते आ रहे हैं। 2012 में सांइस पत्रिका में छपे एक शोध के मुताबिक एच5एन1 बर्ड फ्लू का वायरस बदलकर ऐसा रूप ले सकता है कि वो इंसानों से इंसानों के बीच तेजी से फैल सके। शोधकर्ताओं ने इस वायरस के पांच जैविक परिवर्तनों की पहचान की थी। उनका मानना था कि ये वायरस इंसानों के बीच महामारी बनकर कहर ढा सकता है।

 

संक्रमित पक्षियों के बेहद करीब जाने से इंसान को होता है बर्ड फ्लू
शोध को करने वाली टीम का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर रॉन फोशियर ने मीडिया को दिए साक्षात्कार में कहा था कि इस शोध के बाद बर्ड फ्लू से फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ टीके और विषाणु-रोधी दवाएं तैयार की जा सकती हैं। ये वायरस इंसानों में संक्रमित मुर्गियों या अन्य पक्षियों के बेहद निकट रहने से ही फैलता है। यही वजह है कि विश्व में बर्ड फ्लू से मरने वाले इंसानों की संख्या कम रही। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 2003 से 2012 तक से इस बीमारी से 332 लोग मारे गए हैं। उन्होंने बर्ड फ्लू के वायरस की जैविक संरचना की तुलना इससे पहले इंसानों में महामारी के कारण बनने वाले स्पैनिश फ्लू की जैविक संरचना से की थी।

 

खांसने और छींकने से फ्लू फैलने की आशंका
शोध आशंका जाहिर की थी कि कि H5N1 एक दिन ऐसा रूप ले सकता है कि वो इंसानों के बीच खांसने और छींकने से फैलने लगे। शोधकर्ताओं में डर था कि अगर ऐसा हो गया तो गंभीर महामारी फैल जाएगी जिससे दुनिया भर में करोड़ों लोगों की मौत हो सकती है। ये अध्ययन कहता है कि ऐसे घातक वायरस का अस्तित्व में आना सैद्धांतिक रूप से संभव है। लेकिन शोधकर्ता ऐसा होने की संभावनाओं को सुनिश्चित करने में कामयाब नहीं हुए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसके इंसानों में फैलने की संभावनाओं को बहुत ही कम बताता है। WHO की गाइडलाइंस के तहत एहतिआत बरतने पर बर्ड फ्लू को मानव शरीर में प्रवेश करने से रोका जा सकता है।

 

अमेरीका ने 2007 में वैक्सीन को दी है स्वीकृति
वेब एमडी की साइट पर प्रकाशित जानकारी के मुताबिक 17 अप्रैल 2007 को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन एफ.डी.ए. ने बर्ड फ्लू के एक स्ट्रेन का मानव संक्रमण को रोकने के लिए पहले वैक्सीन को मंजूरी देने की घोषणा की थी। इस वैक्सीन को अमेरिकी संघीय सरकार द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जरूरत पड़ने पर वितरित करने के लिए खरीदा गया है। यह टीका आम जनता को व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया जाता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास वैक्सीन का भंडार है, जरूरत पड़ने पर और अधिक उत्पादन करने की योजना है। 


Author

Suraj Thakur

Recommended News