Bank Locker Rule: लॉकर से गहने गायब होने पर बैंक देगा कितना रिफंड? RBI का नियम जानकर चौंक जाएंगे
punjabkesari.in Friday, Feb 13, 2026 - 09:04 AM (IST)
नेशनल डेस्क: बैंक लॉकर में गहने रखना कितना सुरक्षित है और चोरी होने की स्थिति में आपके क्या अधिकार हैं, इसे लेकर हालिया घटनाओं और आरबीआई (RBI) के नए नियमों पर आधारित एक संपूर्ण और ताजा विस्तृत रिपोर्ट दी है: आईए जानते है विस्तार से...
बैंक लॉकर की सुरक्षा पर बड़ा सवाल: लखनऊ की घटनाओं ने बढ़ाई ग्राहकों की चिंता
गहने और कीमती सामान की सुरक्षा के लिए बैंक लॉकर को सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है, लेकिन हालिया रिपोर्टों ने इस भरोसे को हिला कर रख दिया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आए दो बड़े मामलों ने देशभर के लॉकर धारकों को अलर्ट कर दिया है। इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) की एक शाखा में 42 लॉकर काटकर करोड़ों की लूट का मामला हो या पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में पूर्व मैनेजर पर लगे 48 लाख रुपये के गहने गायब करने के आरोप—इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बैंक की दीवारें भी अभेद्य नहीं हैं। ताज्जुब की बात यह है कि लूट के शिकार कई ग्राहकों को जनवरी 2026 तक उनके नुकसान का महज 10 से 25 प्रतिशत हिस्सा ही वापस मिल पाया है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, कुल बैंक चोरियों में से 20 से 40 प्रतिशत मामले सीधे तौर पर लॉकर रूम से जुड़े होते हैं, जो एक गंभीर सुरक्षा चूक की ओर इशारा करते हैं।
मुआवजे का गणित: 100 गुना रकम का 'कैच' और बैंक की जिम्मेदारी
यदि आपके लॉकर से सामान चोरी होता है या बैंक में आग लग जाती है, तो बैंक मुआवजा देने के लिए बाध्य है, लेकिन इसके नियम काफी सीमित हैं। RBI के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, बैंक की जिम्मेदारी तभी बनती है जब नुकसान बैंक की लापरवाही, सुरक्षा में चूक या बैंक कर्मचारी की धोखाधड़ी के कारण हुआ हो। ऐसी स्थिति में बैंक आपको लॉकर के वार्षिक किराए का अधिकतम 100 गुना मुआवजा देगा। उदाहरण के तौर पर, यदि आपके लॉकर का सालाना किराया 3,000 रुपये है, तो बैंक आपको अधिकतम 3,00,000 (3 लाख) रुपये ही देगा। यदि आपके गहनों की वास्तविक कीमत 20 लाख रुपये भी है, तब भी बैंक की कानूनी देनदारी 3 लाख रुपये तक ही सीमित रहेगी।
प्राकृतिक आपदा में बैंक का पल्ला झाड़ना: 'Act of God' का नियम
आरबीआई के नियमों में एक और महत्वपूर्ण पहलू 'प्राकृतिक आपदा' (Natural Calamity) का है। अगर लॉकर में रखा सामान भूकंप, बाढ़, बिजली गिरने या तूफान जैसी परिस्थितियों के कारण खराब या गायब होता है, तो बैंक 1 रुपये की भी भरपाई करने के लिए उत्तरदायी नहीं है। कानून की भाषा में इसे 'एक्ट ऑफ गॉड' माना जाता है, जिस पर बैंक का कोई नियंत्रण नहीं होता। हाल ही में नेशनल कंज्यूमर कमीशन (NCDRC) ने एक फैसले में बैंक को 'सेवा में कमी' (Deficiency in Service) के लिए दंडित तो किया, लेकिन यह भी साफ किया कि बैंक लॉकर में रखे सामान का 'बीमाकर्ता' (Insurer) नहीं है।
सुरक्षा के लिए निजी कवच: locker insurance और दस्तावेजीकरण की जरूरत
बैंक की सीमित भरपाई को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बैंक के भरोसे रहना समझदारी नहीं है। अपनी संपत्ति को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए अब बाजार में 'locker insurance' के विकल्प मौजूद हैं। ये Bima plan काफी किफायती होते हैं और चोरी के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं को भी कवर करते हैं।
ग्राहकों को सलाह
इसके अलावा, ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने गहनों की एक विस्तृत सूची, उनके वजन की रसीदें (Invoices) और फोटो हमेशा संभाल कर रखें। जब भी आप लॉकर ऑपरेट करने जाएं, तो बैंक के विजिटर रजिस्टर में अपनी एंट्री जरूर दर्ज करें और यह सुनिश्चित करें कि निकलने से पहले लॉकर पूरी तरह से लॉक हो गया है। डिजिटल साक्ष्यों और रिकॉर्ड्स के इस युग में, आपकी अपनी सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
