Brain Tumor: किन लोगों को ब्रेन ट्यूमर का सबसे ज्यादा खतरा? ये 5 लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क

punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 12:27 PM (IST)

नेशनल डेस्क: मस्तिष्क हमारे शरीर का नियंत्रण केंद्र है, लेकिन अक्सर हम इसके द्वारा दिए जाने वाले छोटे-छोटे संकेतों को 'सामान्य थकान' या 'तनाव' मानकर टाल देते हैं। ब्रेन ट्यूमर एक ऐसी खामोश दस्तक है जो शुरू में बहुत मामूली लगती है, लेकिन अनदेखी करने पर जानलेवा साबित हो सकती है। चिकित्सा जगत में इसे कोशिकाओं की 'असामान्य वृद्धि' कहा जाता है, जो समय के साथ मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बंधक बना लेती है।

क्या है ब्रेन ट्यूमर का असली विज्ञान?

ब्रेन ट्यूमर दरअसल मस्तिष्क में कोशिकाओं का एक ऐसा झुंड है जो अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगता है। ये दो प्रकार के होते हैं:-

  1. बेनाइन (Benign): ये गैर-कैंसरकारी होते हैं और धीरे बढ़ते हैं।

  2. मेलिग्नेंट (Malignant): ये कैंसरकारी होते हैं और बहुत तेजी से दिमाग के अन्य हिस्सों में फैलते हैं।

जैसे-जैसे इनका आकार बढ़ता है, ये मस्तिष्क के ऊतकों पर दबाव डालते हैं, जिससे शरीर के अंगों का संतुलन बिगड़ने लगता है।

रेड फ्लैग: जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

यदि आपके शरीर में निम्नलिखित बदलाव बार-बार दिख रहे हैं, तो सावधान हो जाएं:

  • असामान्य सिरदर्द: सुबह के वक्त तेज दर्द होना जो समय के साथ बढ़ता जाए।

  • दृष्टि दोष: धुंधला दिखना या अचानक आंखों के सामने अंधेरा छाना।

  • संतुलन खोना: चलते समय लड़खड़ाना या चक्कर आना।

  • याददाश्त और व्यवहार: छोटी-छोटी बातें भूलना या स्वभाव में अचानक चिड़चिड़ापन आना।

  • मिचली: बिना किसी पेट की खराबी के बार-बार उल्टी जैसा महसूस होना।

इन लोगों को ब्रेन ट्यूमर का ज्यादा खतरा?

कुछ खास स्थितियां इस बीमारी की संभावना को बढ़ा देती हैं:-

  • अनुवांशिकता: यदि परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही हो।

  • रेडिएशन का प्रभाव: जो लोग लंबे समय तक एक्स-रे, सीटी स्कैन या हाई-वोल्टेज रेडिएशन के संपर्क में रहते हैं।

  • उम्र का कारक: हालांकि यह किसी को भी हो सकता है, लेकिन 40 से 50 वर्ष की आयु के बाद जोखिम अधिक देखा गया है।

  • विषाक्त वातावरण: औद्योगिक रसायनों, ईंधन और तेज गंध वाले केमिकल्स के बीच काम करने वाले लोग।

 बचाव की ढाल: क्या है विशेषज्ञों की राय?

पूरी तरह सुरक्षा की गारंटी तो नहीं दी जा सकती, लेकिन जीवनशैली में बदलाव जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं:

  • जांच में सावधानी: बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार रेडिएशन वाली जांच (जैसे सीटी स्कैन) न करवाएं।

  • केमिकल से दूरी: कीटनाशकों और हानिकारक रसायनों के सीधे संपर्क से बचें।

  • सक्रिय दिनचर्या: योग और ध्यान न केवल शरीर बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं को भी स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

  • पोषण: एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल और हरी सब्जियों को प्राथमिकता दें।

 


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Content Editor

Anu Malhotra

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