Blood Cancer: ब्लड कैंसर से हुई एक्टर प्रदीप रावत की मौत, शरीर में दिखे ये संकेत भूलकर भी न करें नजरअंदाज

punjabkesari.in Wednesday, Aug 05, 2026 - 04:26 PM (IST)

मुंबई:  'गजनी' जैसी फिल्मों में शानदार एक्टिंग के लिए मशहूर दिग्गज एक्टर प्रदीप रावत का बिते मंगलवार शाम करीब 6 बजे कैंसर का इलाज के दौरान निधन हो गया। वे 74 साल के थे। खबरों के मुताबिक, रावत को पहले मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, और बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें करीब 10 दिन पहले भिवंडी के एक खास कैंसर अस्पताल में शिफ्ट किया गया था लेकिन बीती शाम उनका निधन हो गया।

उनके निधन ने सेहत से जुड़े एक अहम सवाल की ओर ध्यान खींचा है... क्या उम्र बढ़ने के साथ कैंसर का खतरा बढ़ जाता है? हालांकि बढ़ती उम्र कई तरह के कैंसर के लिए सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है, लेकिन ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) इस बात पर ज़ोर देते हैं कि सिर्फ़ उम्र बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को यह बीमारी होगी ही।

बता दें कि ब्लड कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जो शरीर के खून, बोन मैरो और लिम्फेटिक सिस्टम पर सीधा प्रभाव डालती है। यह बीमारी धीरे-धीरे भी बढ़ सकती है और कुछ मामलों में बहुत तेजी से फैलती है। इसलिए समय पर इसकी पहचान और इलाज बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग ब्लड कैंसर की चपेट में आते हैं। अनुमान है कि हर साल 1 लाख से अधिक नए मरीज सामने आते हैं, जबकि लगभग 70 हजार लोगों की इस बीमारी के कारण मौत हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और शुरुआती जांच से इलाज के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

ब्लड कैंसर क्या होता है?
ब्लड कैंसर ऐसी बीमारियों का समूह है, जिसमें शरीर की रक्त कोशिकाएं सामान्य तरीके से काम करना बंद कर देती हैं। इसका असर खून बनाने वाली कोशिकाओं, बोन मैरो और लिम्फेटिक सिस्टम पर पड़ता है। बीमारी बढ़ने पर शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता भी कमजोर होने लगती है।

ब्लड कैंसर के मुख्य प्रकार
विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड कैंसर तीन प्रकार का होता है...
1. ल्यूकेमिया 
इसमें बोन मैरो असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं (White Blood Cells) बनाना शुरू कर देता है, जिससे सामान्य रक्त कोशिकाओं का  काम प्रभावित होने लगता है।

2. लिम्फोमा 
यह कैंसर लिम्फेटिक सिस्टम को प्रभावित करता है, जो शरीर की Immunity का अहम हिस्सा होता है।

3. मल्टीपल मायलोमा 
यह प्लाज्मा कोशिकाओं में होने वाला कैंसर है, जिससे शरीर की Immunity कमजोर हो सकती है।

ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण

शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बीमारी जैसे लग सकते हैं, इसलिए कई लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। यदि नीचे दिए गए लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

-लगातार बुखार रहना और दवा के बाद भी ठीक न होना।
-बिना किसी कारण तेजी से वजन कम होना।
-हर समय थकान या कमजोरी महसूस होना।
-बार-बार संक्रमण होना।
-रात में जरूरत से ज्यादा पसीना आना।
-गर्दन, बगल या शरीर के अन्य हिस्सों की लिम्फ नोड्स में सूजन आना।
-मामूली चोट पर भी आसानी से खून निकलना या शरीर पर नीले निशान बन जाना।
-हड्डियों में लगातार दर्द या कमजोरी महसूस होना।

इन लोगों में खतरा ज्यादा 
हालांकि ब्लड कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं माना जाता, लेकिन कुछ स्थितियों में इसका खतरा बढ़ सकता है।
-बढ़ती उम्र।
-परिवार में कैंसर का इतिहास 
-पहले कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी ले चुके लोग।
-धूम्रपान करने वाले।
-बेंजीन जैसे हानिकारक रसायनों के लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोग।

समय पर चेकअप जरूरी 
यदि ऊपर बताए गए लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार दिखाई दें, तो उन्हें सामान्य कमजोरी या मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर की सलाह, जांच और सही इलाज से कई मामलों में बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लि है। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Anu Malhotra

Related News