Medicine Price: 1 अगस्त से  22 जरूरी दवाओं के बदले दाम, सरकार ने जारी किए नए रेट

punjabkesari.in Saturday, Aug 01, 2026 - 01:46 PM (IST)

नई दिल्ली: अगस्त का महीना शुरू होते ही सरकार ने कई अहम बदलाव किए। जिसमें से सबसे अहम दवाओं के बदले दाम है। केंद्र सरकार ने आम लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए 1 अगस्त से 22 दवाओं और फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) के नए रिटेल प्राइस लागू कर दिए हैं। इन नई कीमतों के लागू होने के बाद कोई भी दवा निर्माता, वितरक या मेडिकल स्टोर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत नहीं वसूल सकेगा। 

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, नई कीमतें हार्ट, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक, मानसिक स्वास्थ्य, बुखार, एंग्जायटी, आयरन, फोलिक एसिड और महिलाओं की प्रजनन क्षमता (PCOS से जुड़ी) जैसी जरूरी दवाओं पर लागू होंगी।
 
GST को लेकर क्या है नियम?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि दवाओं की तय कीमत के अलावा GST केवल उसी स्थिति में अलग से लिया जा सकता है, जब संबंधित विक्रेता वास्तव में सरकार को GST का भुगतान करता हो। यदि कोई दुकानदार या कंपनी निर्धारित नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसे ग्राहकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि ब्याज सहित वापस करनी होगी।

अस्पतालों और मेडिकल स्टोर को निर्देश
NPPA ने नए रिटेल प्राइस की सूची स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से सभी सरकारी और निजी अस्पतालों तथा मेडिकल स्टोर तक पहुंचा दी है। साथ ही सभी दवा विक्रेताओं को नए रेट का सख्ती से पालन करने और जरूरत पड़ने पर ग्राहकों को निर्धारित कीमत की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

इससे पहले 8 जुलाई को भी NPPA ने 39 दवाओं के नए रिटेल प्राइस तय किए थे। ये कीमतें औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत निर्धारित की गई थीं ताकि आम लोगों को आवश्यक दवाएं उचित कीमत पर मिल सकें।

उस समय जिन प्रमुख दवाओं के रेट तय किए गए थे, उनमें शामिल हैं-
एमलोडिपाइन, बिसोप्रोलोल और टेल्मिसार्टन टैबलेट - 14.74 रुपये प्रति टैबलेट
नेपाफेनाक और मोक्सीफ्लोक्सासिन आई ड्रॉप - 68.64 रुपये प्रति मिलीलीटर
क्लोपिडोग्रेल, एस्पिरिन और एटोरवास्टेटिन कैप्सूल - 6.37 रुपये प्रति कैप्सूल

नियम तोड़ने पर कार्रवाई
सरकार के अनुसार, यदि कोई दवा निर्माता, वितरक या मेडिकल स्टोर तय रिटेल प्राइस से अधिक कीमत वसूलता है, तो उससे अतिरिक्त वसूली गई पूरी राशि ब्याज सहित वापस कराई जाएगी। इसके अलावा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और दवा मूल्य नियंत्रण से जुड़े नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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