CIA के खुफिया दस्तावेजों में Shocking खुलासा, 9/11 से पहले लादेन की ‘हिट लिस्ट’ में था भारत

punjabkesari.in Sunday, Sep 13, 2026 - 12:04 PM (IST)

Washington: अमेरिका में  9/11 हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर CIA की ओर से जारी गोपनीय दस्तावेजों ने आतंकी संगठन अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन की खतरनाक साजिशों की एक और परत खोल दी है। सामने आए 1998 के एक खुफिया मेमो के मुताबिक, 9/11 से करीब तीन साल पहले ही लादेन का आतंकी नेटवर्क भारत समेत कई देशों में हमले करने की क्षमता और इरादे को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसी की नजर में था। यानी अमेरिका पर 9/11 का हमला होने से पहले ही लादेन का आतंकी साया भारत तक पहुंच चुका था।

 

1998 के मेमो में भारत का नाम
CIA की ओर से जारी 70 से अधिक दस्तावेजों में 28 अगस्त 1998 का एक खुफिया मेमो भी शामिल है। इसका शीर्षक था- ‘बिन लादेन का आतंकवादी नेटवर्क अभी भी एक खतरा है।’ इस रिपोर्ट में लादेन के नेटवर्क से जुड़े संभावित खतरों और विभिन्न देशों में हमले की आशंकाओं का आकलन किया गया था। मेमो में भारत के अलावा पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन, युगांडा और नाइजीरिया जैसे देशों का भी नाम सामने आता है। इससे पता चलता है कि लादेन का आतंकी नेटवर्क केवल अमेरिका या पश्चिमी देशों तक सीमित खतरे के रूप में नहीं देखा जा रहा था। हालांकि, भारत के मामले में दस्तावेज किसी विशेष शहर, ठिकाने या व्यक्ति को निशाना बनाने की बात नहीं करता। इसमें किसी हमले की निश्चित तारीख या विस्तृत योजना का भी उल्लेख नहीं है। रिपोर्ट में दी गई जानकारी का स्रोत भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए इसे भारत पर हमले की पक्की साजिश के बजाय उस समय अमेरिकी खुफिया एजेंसी द्वारा आंके गए संभावित खतरे के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।

 

अमेरिका और ब्रिटेन पर भी मंडरा रहा था खतरा
दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि 2001 में हुए 9/11 हमलों से काफी पहले लादेन और उसका नेटवर्क पश्चिमी देशों के खिलाफ बड़े हमलों की तैयारी में जुटा हुआ था। एक खुफिया आकलन में चेतावनी दी गई थी कि लादेन अफगानिस्तान में मौजूद अपने नेटवर्क और सहयोगी संगठनों के जरिए दुनिया के कम से कम 60 देशों में हमले करने की क्षमता रखता था। रिपोर्ट में अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ संभावित नए हमलों को लेकर भी चिंता जताई गई थी। CIA के जारी दस्तावेज 1998 से 2001 के बीच के हैं। इनमें यह भी सामने आता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और बाद में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के प्रशासन को अल-कायदा और लादेन से पैदा हो रहे खतरे को लेकर कई बार चेतावनी दी थी। इन रिपोर्टों से साफ होता है कि 9/11 से पहले ही अमेरिकी खुफिया तंत्र लादेन के नेटवर्क को गंभीर आतंकी खतरे के रूप में देख रहा था। हालांकि, बाद में 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए हमलों ने इस खतरे की भयावहता को पूरी दुनिया के सामने ला दिया।

 

9/11 में क्या हुआ था?
11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के 19 आतंकवादियों ने चार वाणिज्यिक विमानों का अपहरण कर लिया था। इनमें से दो विमानों को न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की दोनों इमारतों से टकराया गया। भीषण हमलों के बाद दोनों इमारतें ढह गईं। तीसरा विमान वर्जीनिया स्थित अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन से टकराया। चौथा विमान भी अपने कथित लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका। यात्रियों के प्रतिरोध के बाद यह विमान पेंसिलवेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 9/11 हमलों में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ अभियान तेज किया और ओसामा बिन लादेन को दुनिया के सबसे वांछित आतंकवादियों में शामिल कर दिया। CIA के अब सार्वजनिक किए गए दस्तावेज इस पूरे दौर को समझने के लिए अहम हैं, क्योंकि इनमें यह संकेत मिलता है कि लादेन का नेटवर्क 9/11 से बहुत पहले ही कई देशों के लिए संभावित खतरे के रूप में सामने आ चुका था।

 
 


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Content Writer

Tanuja

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