7 साल बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग, मोदी से मुलाकात पर टिकी नजरें; BRICS में बनेगा नया समीकरण?
punjabkesari.in Thursday, Sep 10, 2026 - 06:23 PM (IST)
Bejing:चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और चीन 2020 के सीमा तनाव के बाद रिश्तों में आई खटास को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिल्ली में शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी की आमने-सामने मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देगी? शी जिनपिंग की यह यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण है। वह आखिरी बार 2019 में भारत आए थे, जब चेन्नई के पास मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई थी। इससे पहले उन्होंने 2016 में गोवा में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लिया था।
अब करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा हो रही है। यह 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच पैदा हुए गंभीर सीमा तनाव के बाद शी का पहला भारत दौरा होगा। ब्रिक्स सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात की संभावना पर खास नजर है। हालांकि चीन की आधिकारिक घोषणा में फिलहाल सिर्फ ब्रिक्स सम्मेलन में शी की भागीदारी की पुष्टि की गई है। संभावित द्विपक्षीय बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि दोनों देश पिछले कुछ समय से सीमा विवाद के बावजूद रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
अगर दोनों नेताओं की बैठक होती है तो सीमा विवाद, सीमा प्रबंधन, व्यापार, निवेश और दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ाने जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं। शी की भारत यात्रा से पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में सीमा मुद्दे पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई थी। 25 अगस्त को विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 25वें दौर में दोनों पक्ष सीमा परिसीमन और सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर आगे बातचीत जारी रखने को लेकर सहमत हुए थे। ऐसे में शी की दिल्ली यात्रा को भारत-चीन संबंधों में जारी कूटनीतिक कोशिशों की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
