चीन को दो तरफ से घेरने की तैयारी: पहली बार भारत आएंगे जापान के लड़ाकू विमान, सैन्य विशेषज्ञों की नजर भारतीय वायुसेना पर
punjabkesari.in Wednesday, Sep 02, 2026 - 05:04 PM (IST)
Tokyo: भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग एक नए स्तर पर पहुंचने जा रहा है। जापान के लड़ाकू विमान पहली बार भारतीय धरती पर उतरेंगे और भारतीय वायुसेना के साथ संयुक्त हवाई युद्धाभ्यास करेंगे। ‘वीर गार्जियन-26’ नाम का यह अभ्यास राजस्थान के जोधपुर वायुसेना स्टेशन और आसपास के हवाई क्षेत्र में 9 से 21 सितंबर 2026 तक आयोजित होगा। जापान की वायु आत्मरक्षा सेना इस अभ्यास के लिए तीन एफ-2ए लड़ाकू विमान और करीब 110 सैन्यकर्मियों को भारत भेज रही है। जापान के रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार होगा जब जापानी लड़ाकू विमान किसी संयुक्त अभ्यास के लिए भारत आएंगे।
जापान ने बताया है कि अभ्यास का मुख्य उद्देश्य लड़ाकू विमानों के बीच युद्ध प्रशिक्षण के जरिए दोनों देशों की वायु सेनाओं की सामरिक क्षमता बढ़ाना और आपसी समझ को मजबूत करना है। भारतीय वायुसेना की ओर से कौन से विमान अभ्यास में शामिल होंगे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं की गई है। हालांकि, पहले के संयुक्त अभ्यास और भारतीय वायुसेना की क्षमता को देखते हुए सुखोई-30 एमकेआई के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यदि सुखोई-30 एमकेआई शामिल होते हैं तो भारतीय और जापानी पायलटों को एक-दूसरे के बिल्कुल अलग प्रकार के लड़ाकू विमानों के खिलाफ प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। यह ध्यान रखना जरूरी है कि सुखोई-30 एमकेआई की भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
2023 में जापान में हुआ था पहला मुकाबला
भारत और जापान के बीच पहला संयुक्त लड़ाकू विमान अभ्यास ‘वीर गार्जियन-23’ जनवरी 2023 में जापान के हयाकुरी वायुसेना अड्डे पर हुआ था। उस समय भारत ने चार सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान भेजे थे। जापान की ओर से चार एफ-2 और चार एफ-15 विमान शामिल हुए थे। दोनों देशों ने जटिल परिस्थितियों में हवाई युद्ध और सामरिक प्रशिक्षण किया था। अब तीन साल बाद अभ्यास का रुख बदल गया है और जापान अपने लड़ाकू विमानों को भारत भेज रहा है।
सैन्य विशेषज्ञों की नजर भारतीय वायुसेना पर
सैन्य विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि भारतीय वायुसेना इस बार किन विमानों को उतारती है। यदि सुखोई-30 एमकेआई शामिल होते हैं तो जापानी एफ-2ए और भारतीय सुखोई के बीच अलग-अलग क्षमताओं वाले लड़ाकू विमानों का प्रशिक्षण देखने को मिल सकता है। जापानी पायलटों के लिए भारतीय सुखोई जैसे भारी श्रेणी के लड़ाकू विमान के खिलाफ अभ्यास महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं भारतीय पायलटों को एफ-2ए की अलग उड़ान प्रणाली, रडार और बहुउद्देश्यीय युद्ध क्षमता को समझने का अवसर मिलेगा।
चीन के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच अहम अभ्यास
भारत और जापान दोनों ही चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर सतर्क हैं। जापान को पूर्वी चीन सागर, सेनकाकू द्वीपों और ताइवान के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियों का सामना करना पड़ता है। दूसरी तरफ भारत का चीन के साथ हिमालयी सीमा पर लंबे समय से तनाव और सीमा विवाद है। ऐसे समय में भारत और जापान की वायु सेनाओं का यह संयुक्त अभ्यास दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक रूप से इस अभ्यास को किसी एक देश के खिलाफ नहीं बताया गया है।
‘मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत’ पर साझी सोच
भारत और जापान लंबे समय से मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा पर सहयोग बढ़ा रहे हैं। जापान के वायुसेना प्रमुख ने कहा है कि यह अभ्यास दोनों देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने भी हाल में कहा था कि संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अधिक जटिल और व्यापक बनाया जाएगा। जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने मानव रहित प्रणालियों के उपयोग और भविष्य में अधिक उन्नत संयुक्त अभ्यासों की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
