अमेरिकी रिपोर्ट में भारत के परमाणु भंडार पर बड़ा खुलासा, ताकत जानकर दुनिया के कई देश अवाक्
punjabkesari.in Thursday, Sep 10, 2026 - 04:14 PM (IST)
Washington: अमेरिका के एक गैर लाभकारी विचार समूह के अनुसार, भारत के परमाणु जखीरे में 190 आयुध होने का अनुमान है, जिनमें वर्तमान में निर्मित की जा रही नयी मिसाइलों के लिए 30 अतिरिक्त परमाणु आयुध भी शामिल हैं। 'फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स' (एफएएस) ने ये अनुमान खुले स्रोत, सरकारी डेटा और वाणिज्यिक उपग्रहों से ली गई तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर लगाए हैं। एफएएस परमाणु सूचना परियोजना के निदेशक हैंस क्रिस्टेंसन के लेख 'इंडियाज न्यूक्लियर वेपन्स-2026' के अनुसार, ''परमाणु आयुध से मिसाइल को लैस करने की भारत की क्षमता और रणनीति के बारे में उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर, हमारा अनुमान है कि भारत ने लगभग 190 परमाणु आयुध बनाए होंगे।''
इसमें कहा गया है कि भारत के परमाणु आयुध भंडार में 'लॉन्चर' के लिए 160 से अधिक आयुध और निर्मित हो रही नयी मिसाइलों के लिए अतिरिक्त आयुध शामिल हैं। बुधवार को प्रकाशित एक आलेख में बताया गया है कि भारत अपने परमाणु आयुध के जखीरे को आधुनिक बनाने का काम जारी रखे हुए है। हाल के वर्षों में कई नयी हथियार प्रणाली तैनात की गई हैं और कई अन्य प्रणाली विकसित की जा रही हैं, ताकि परमाणु आयुध से लैस किये जा सकने वाले मौजूदा विमानों, सतह से मार करने वाली मिसाइल और समुद्र-आधारित प्रणाली को बेहतर बनाया जा सके, या उनकी जगह नयी प्रणाली लाई जा सके। आलेख में कहा गया है, ''हमारा अनुमान है कि भारत ने 140 से लेकर 225 परमाणु आयुध तक के लिए पर्याप्त सैन्य प्लूटोनियम का उत्पादन किया होगा और 190 तक तैयार कर लिए होंगे।
कई और हथियार प्रणालियों के विकास के साथ, देश के (परमाणु) आयुध जखीरे में और वृद्धि होने की संभावना है।'' इसमें कहा गया है, ''आयुध के डिजाइन चाहे जैसे भी हों, इस बात की संभावना कम है कि भारत ने अपने सारे प्लूटोनियम का इस्तेमाल परमाणु आयुध बनाने में किया हो। हो सकता है कि उसने कुछ हिस्सा रिजर्व में रखा हो।'' आलेख में यह भी कहा गया है कि भारत के परमाणु आयुध के जखीरे का आकार उन लॉन्चर की संख्या और प्रकार पर भी निर्भर करता है जो उन्हें ले जा सकते हैं, क्योंकि इस बात की संभावना कम है कि वह इन प्रणालियों की क्षमता से कहीं अधिक परमाणु आयुध बनाएगा। भारत सरकार ने हाल में संसद को बताया था वह भरोसेमंद न्यूनतम प्रतिरोध और परमाणु हथियारों का 'पहले इस्तेमाल न करने' की नीति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
