गलत तरीके से बीमा उत्पाद बेचने के बजाय अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान दें बैंक: निर्मला सीतारमण

punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 05:04 PM (IST)

नेशनल डेस्क: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को बीमा सहित वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को कहा कि यह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत एक अपराध है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय निदेशक मंडल को बजट के बाद संबोधित करने के उपरांत पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा, '' बैंकों को अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए। मैंने हमेशा से इस बात पर आपत्ति जतायी है कि आप उस बीमा को बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं जिसकी आवश्यकता ही नहीं है और यह मामला आरबीआई और इरेडा के बीच फंसा रहा।''

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद की बिक्री पर दिशानिर्देशों का मसौदा 11 फरवरी को जारी किया था। इसमें कहा गया है कि यदि किसी ग्राहक को गलत तरीके से उत्पाद या सेवा दी जाती है, तो बैंक को ग्राहक द्वारा चुकाई गई पूरी राशि लौटानी होगी और स्वीकृत नीति के अनुसार हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इस पर चार मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं। आरबीआई ने कहा कि गलत तरीके से बिक्री पर कड़े नियम एक जुलाई से लागू होंगे।

सीतारमण ने कहा, ''मुझे खुशी है कि आरबीआई यह स्पष्ट मार्गदर्शन दे रहा है कि गलत तरीके से बिक्री क्यों बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संदेश, बैंकों तक जाना चाहिए कि आप गलत बिक्री नहीं कर सकते। यह भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध है।'' उन्होंने कहा कि कई मामलों में बैंक ग्राहकों को बीमा उत्पाद खरीदने के लिए कहते हैं जबकि उनके पास पहले से आवश्यक बीमा होता है। आरबीआई यह सोचकर ऐसे मामलों की निगरानी नहीं कर रहा था कि यह बीमा नियामक के दायरे में आता है।

भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरेडा) का मानना था कि बैंक उसके प्रत्यक्ष नियमन में नहीं आते। इस नियामकीय अंतर के कारण ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति गिरवी रखकर गृह ऋण लेता है, तो उससे अतिरिक्त बीमा लेने को क्यों कहा जाता है जबकि जोखिम पहले से 'कवर' होता है। सीतारमण ने दोहराया कि बैंकों को अपने ग्राहकों की जरूरतों, उनकी वित्तीय स्थिति एवं कारोबारी चक्र को समझने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बैंकों का मुख्य कार्य जमा जुटाना एवं ऋण देना है। गैर-बैंकिंग उत्पाद बेचने के बजाय उन्हें कम लागत वाली जमा या कासा (चालू खाता बचत खाता) आधार को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। इस बीच, आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में जमा वृद्धि लगभग 12.5 प्रतिशत है जबकि ऋण वृद्धि दर 14.5 प्रतिशत के आसपास है। मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) आगे की नीतिगत दरों में कटौती पर निर्णय वृद्धि और मुद्रास्फीति की स्थिति को देखते हुए करेगी।

आरबीआई ने फरवरी, 2025 से नीतिगत रेपो दर में 1.25 प्रतिशत की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत कर दिया है, ताकि नियंत्रित मुद्रास्फीति के बीच वृद्धि को प्रोत्साहन दिया जा सके। हालांकि, इस महीने की पिछली मौद्रिक समीक्षा बैठक में वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एमपीसी ने तटस्थ रुख के साथ यथास्थिति बनाए रखने का निर्णय लिया। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा छह अप्रैल को की जाएगी। बाजार को आश्वस्त करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई सभी बाजार खंडों को पर्याप्त एवं सतत नकदी उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। भाषा निहारिका अजय


 


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Content Editor

Mansa Devi

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