बांग्लादेश में हिंदू धार्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास को मिली जमानत, जेल से बाहर निकलना अब भी मुश्किल

punjabkesari.in Monday, Sep 07, 2026 - 03:26 PM (IST)

Dhaka: बांग्लादेश के प्रमुख हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास को दो मामलों में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन इसके बावजूद उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकेगी। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, दो अन्य मामलों के चलते वह अभी भी जेल में रहेंगे। चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता हैं। रविवार को हाईकोर्ट की जस्टिस केएम जाहिद सरवर और जस्टिस शेख अबू ताहेर की पीठ ने उनकी ओर से दाखिल दो अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की और दोनों मामलों में जमानत मंजूर कर दी। ये दोनों मामले 26 नवंबर 2024 को चटगांव के कोतवाली पुलिस थाने में दर्ज किए गए थे। इनमें तोड़फोड़ करने और पुलिसकर्मियों को उनके सरकारी कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने के आरोप लगाए गए थे। चिन्मय के वकील अपूर्ब कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि हिंदू नेता के खिलाफ कुल 6 मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या और राजद्रोह जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं।


पांच मामलों में मिल चुकी राहत
वकील के मुताबिक, चिन्मय कृष्ण दास को अब तक हाईकोर्ट और निचली अदालतों से पांच मामलों में जमानत मिल चुकी है। हालांकि, राजद्रोह के मामले में हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय पीठ ने रोक लगा रखी है। यही वजह है कि दो और मामलों में जमानत मिलने के बावजूद चिन्मय की तत्काल रिहाई संभव नहीं हो पाई है।

 

नवंबर 2024 से जेल में हैं चिन्मय
चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका में गिरफ्तार किया गया था। अगले दिन चटगांव की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर उन्हें जेल भेज दिया था। बाद में 11 दिसंबर 2024 को भी अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। उनकी गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे। उनकी गिरफ्तारी का मुद्दा भारत समेत कई देशों में भी चर्चा का विषय बना।

 

CoHNA ने बताया 'सरकारी उत्पीड़न'
इस बीच, उत्तरी अमेरिका के हिंदुओं के लिए काम करने वाले संगठन Coalition of Hindus of North America (CoHNA) ने चिन्मय कृष्ण दास की लगातार हिरासत पर चिंता जताई है। संगठन ने सोशल मीडिया पोस्ट में उनकी हिरासत को “सरकार प्रायोजित उत्पीड़न” बताया और सवाल उठाया कि जिस हत्या के मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया है, वह कथित तौर पर उनकी पुलिस हिरासत के बाद हुई थी। CoHNA ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन ने दावा किया कि देश में हिंदू आबादी का हिस्सा 1951 में करीब 22 प्रतिशत था, जो अब लगभग 8 प्रतिशत रह गया है। इन आंकड़ों और संगठन द्वारा इस्तेमाल किए गए “धीमा नरसंहार” जैसे शब्दों को CoHNA के आरोप के तौर पर देखा जाना चाहिए। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं और अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग से भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर नजर रखने का सवाल उठाया।

 

चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ दर्ज मामलों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल उन्हें कई मामलों में कानूनी राहत मिल चुकी है, लेकिन राजद्रोह समेत लंबित मामलों के कारण उनकी जेल से पूरी तरह रिहाई अभी भी अटकी हुई है।

 
 


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Content Writer

Tanuja

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