बजाज आलियांज के कैशलेस सेवा बंद होने पर अस्पतालों और मरीजों को भारी परेशानी, AHPI के महानिदेशक का बयान आया सामने
punjabkesari.in Friday, Aug 29, 2025 - 02:09 PM (IST)

नई दिल्ली। अस्पतालों की हालत पर गहरी चिंता जताते हुए एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (एएचपीआई) ने बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के सामने अपने सदस्य अस्पतालों की समस्या रखी। बता दें हाल ही में बजाज आलियांज ने अपने पॉलिसीधारकों के लिए कई अस्पतालों में कैशलेस सेवाएं बंद करने का फैसला लिया था, जिससे अस्पताल और मरीज दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं। अब इस मामले पर एएचपीआई के महानिदेशक का बयान सामने आया है।
कैशलेस सेवा बंद होने से अस्पतालों और मरीजों को भारी परेशानी
बैठक में एएचपीआई के सदस्यों और बजाज आलियांज के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मुद्दे पर चर्चा की। अस्पतालों ने बताया कि कैशलेस सेवाओं के बंद होने से वे आर्थिक और संचालन दोनों तरह के दबाव में आ गए हैं। इससे मरीजों को उनकी पसंद के अस्पतालों में बिना नकद भुगतान इलाज नहीं मिल पा रहा है। मरीज परेशान हैं और अस्पतालों को भी उनके गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। एएचपीआई ने बताया कि बजाज आलियांज ने कैशलेस सेवाएं अचानक बंद कर दीं, जिससे अस्पतालों पर टैरिफ कम करने के लिए दबाव बढ़ा है। एएचपीआई ने बताया कि वह इसे अनुचित और गैरकानूनी मानता है। संगठन का कहना है कि इस तरह के कदम से मरीजों के हितों की अनदेखी हो रही है और अस्पतालों की स्थिरता खतरे में पड़ रही है।
बीमा कंपनियों से मांग, कैशलेस सेवाएं तुरंत बहाल करें
एएचपीआई ने बीमा कंपनियों से आग्रह किया है कि वे तुरंत कैशलेस सेवाओं को बहाल करें ताकि मरीजों को अनावश्यक परेशानी न हो। यह भी कहा गया कि बीमा कंपनियों को अस्पतालों के साथ नियमित संवाद बनाए रखना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कोई विवाद उत्पन्न न हो। अस्पतालों ने यह भी बताया कि लगातार बढ़ती मेडिकल लागत और परिचालन खर्चों के बावजूद, बजाज आलियांज ने दरों में संशोधन नहीं किया है। एएचपीआई ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है और दरों के उचित संशोधन की मांग की है।
एएचपीआई के महानिदेशक का बयान आया सामने
एएचपीआई के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी ने कहा, "हम बीमा कंपनियों के साथ मिलकर मरीजों के हित में समस्याओं का समाधान चाहते हैं। हमें उम्मीद है कि बीमा कंपनियां पुरानी दरों को संशोधित करेंगी, शिकायत तंत्र पारदर्शी बनाएंगी और अस्पतालों की नैदानिक स्वतंत्रता का सम्मान करेंगी।" डॉ. ज्ञानी ने यह भी बताया कि बीमा कंपनियों के टैरिफ कम करने के कदम, दावों को अस्वीकार करना और चिकित्सा निर्णयों में हस्तक्षेप करना मरीजों के अधिकारों के खिलाफ है।
बैठक में नए तकनीकी समाधानों को अपनाने और एक मजबूत, पारदर्शी शिकायत तंत्र बनाने की भी बात हुई। अस्पताल चाहते हैं कि मरीजों को बेहतर सेवा मिले और किसी भी तरह के विवाद को जल्दी सुलझाया जाए।