Air India फुकेट-दिल्ली उड़ान मामले की जांच में नया खुलासा, ट्रिपल हाइड्रोलिक फ़ेलियर के बाद 4 सेकंड तक नहीं रहा कंट्रोल

punjabkesari.in Friday, Aug 14, 2026 - 12:07 PM (IST)

नई दिल्ली: एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट में आई गड़बड़ी को लेकर अब एक नया अपडेट सामने आया है। 4 अगस्त, 2026 को फुकेत से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के एयरबस A320 एयरक्राफ्ट की ऊंचाई अचानक 300 फीट कम होने की जांच जारी है। इस घटनाक्रम के कारण विमान के एलिवेटर और एलिरॉन कंट्रोल सरफेस लगभग चार सेकंड के लिए काम नहीं कर पाए।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस घटना के पीछे मुख्य वजह हाइड्रोलिक प्रेशर में कुछ समय के लिए आई कमी थी। यह तकनीकी जांच एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 (एयरबस A320, MSN 08470 और रजिस्ट्रेशन VT-EXO) के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर को डिकोड करने के बाद की गई। 4 अगस्त, 2026 को फुकेत से दिल्ली की उड़ान के दौरान एयरक्राफ्ट की ऊंचाई अचानक कम हो गई थी, जिसके बाद क्रू ने कंट्रोल वापस हासिल किया और दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग की।

शुरुआती जांच के मुताबिक, एयरक्राफ्ट के ग्रीन, ब्लू और येलो सिस्टम में एक के बाद एक हाइड्रोलिक प्रेशर कम हो गया था। ये हाइड्रोलिक लाइनें एयरफ्रेम के मुख्य फ्लाइट कंट्रोल को पावर देती हैं, जिनमें पिच एटीट्यूड को कंट्रोल करने वाले एलिवेटर, रोल को मैनेज करने वाले एलिरॉन और स्पॉइलर शामिल हैं।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि प्रेशर कम होने के बाद लगभग चार सेकंड तक एलिवेटर और एलिरॉन काम नहीं कर रहे थे। इस छोटे से समय में, पिच एटीट्यूड अचानक बदल गया, ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया और सिस्टम के ठीक होने और पायलटों के मैनुअल कंट्रोल संभालने से पहले प्लेन की ऊंचाई कम हो गई। अपनी तकनीकी जांच में, एयरबस ने कहा कि यह घटना इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की खराबी के बजाय मैकेनिकल कंट्रोल रिस्पॉन्स की वजह से हुई।

एयरबस ने कहा, "यह व्यवहार वैसा ही है जैसा हाइड्रोलिक प्रेशर कम होने पर होता है।" कंपनी ने बताया कि ऊंचाई कम होने के दौरान फ्लाइट कंट्रोल सरफेस डैम्पिंग मोड में चले गए थे। एयरबस को प्राइमरी फ़्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर में कोई खराबी नहीं दिख रही है, समस्या हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी लग रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, एयरबस ने एयर इंडिया को तकनीकी सुझाव दिए हैं। विमान बनाने वाली कंपनी ने एयरलाइन से ग्रीन, येलो और ब्लू हाइड्रोलिक सिस्टम, प्रेशर स्विच और ट्रांसड्यूसर पर कई ऑपरेशनल टेस्ट करने को कहा है।

कंपनी ने एयरलाइन को खास प्रेशर ट्रांसड्यूसर और लीक-मेज़रमेंट स्विच को निकालकर उनकी जांच करने का भी निर्देश दिया है। एयरबस ने एयर इंडिया से हाइड्रोलिक सिस्टम के हालिया मेंटेनेंस रिकॉर्ड और घटना के समय के फ़्लाइट गाइडेंस और फ़्लाइट ऑग्मेंटेशन कंप्यूटर के डिटेल्ड डेटा रिकॉर्ड भी मांगे हैं।

इसके अलावा, कंपनी ने स्ट्रक्चरल जांच (ढांचे की जांच) करने की भी सलाह दी है क्योंकि अचानक हुए मूवमेंट से एयरफ़्रेम पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ा था। साथ ही, फ़्लाइट क्रू से घटना के दौरान उन्होंने क्या देखा और महसूस किया, इस बारे में साफ़ रिपोर्ट भी मांगी गई है।सूत्रों का कहना है कि सिस्टम और स्ट्रक्चरल मज़बूती की पूरी जांच एक जटिल प्रक्रिया है और इसमें सामान्य 'एयरक्राफ़्ट-ऑन-ग्राउंड' तकनीकी जांच से ज़्यादा समय लगेगा। इस फ़्लाइट में 137 यात्री (जिनमें तीन छोटे बच्चे शामिल थे) और आठ क्रू मेंबर (दो पायलट और छह केबिन क्रू) सवार थे। ओडिशा के ऊपर अचानक हुए मूवमेंट के कारण 20 यात्री और चार केबिन क्रू मेंबर घायल हो गए। 

 


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Content Editor

Anu Malhotra

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