AI न्याय दिलाने में मदद कर सकता है, लेकिन फैसला लेने वाला नहीं हो सकता: जस्टिस एनवी अंजारिया

punjabkesari.in Sunday, Sep 13, 2026 - 05:25 PM (IST)

गांधीनगर: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एनवी अंजारिया ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बड़ी मात्रा में न्यायिक डेटा का विश्लेषण करने और ऐसे पैटर्न व ट्रेंड पहचानने में मदद कर सकता है, जो सामान्य तौर पर इंसानी नजर से छूट सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि AI किसी मामले में क्या फैसला होना चाहिए, यह तय नहीं कर सकता। जस्टिस अंजारिया गांधीनगर स्थित नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) में आयोजित ‘इंडिया डिजिटल ADR समिट-2026’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल डिजिटल डिस्प्यूट रेजोल्यूशन सेंटर (IDDRC) की डिजिटल पहल ‘SAMYAK’ पोर्टल भी लॉन्च किया।

AI न्याय प्रक्रिया में सहायक की भूमिका निभाए
जस्टिस अंजारिया ने कहा कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल आर्बिट्रेशन या अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं में बड़े स्तर पर किया जाता है, तो इसकी भूमिका को लेकर स्पष्ट सीमाएं तय करना जरूरी होगा। AI न्याय व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है, लेकिन निर्णय लेने वाला नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि AI सैकड़ों मामलों के डेटा का विश्लेषण कर पैटर्न और ट्रेंड सामने ला सकता है। इससे न्यायिक प्रक्रिया में मदद मिल सकती है, लेकिन किसी विशेष मामले के अंतिम नतीजे का निर्धारण AI के भरोसे नहीं किया जाना चाहिए।

जांच और वेरिफिकेशन की आदत जरूरी: अटॉर्नी जनरल
कार्यक्रम को भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कानून के छात्रों से जांच-पड़ताल की वैज्ञानिक पद्धति विकसित करने का आह्वान किया। वेंकटरमणी ने कहा कि शक, खंडन और वेरिफिकेशन विज्ञान की बुनियाद हैं। छात्रों को किसी भी जानकारी को बिना जांचे स्वीकार करने के बजाय उस पर सवाल उठाने, उसे चुनौती देने और उसका सत्यापन करने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने NFSU की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान में वैश्विक स्तर का उत्कृष्टता केंद्र बनने की क्षमता है और शुरुआती उपलब्धियां इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत करने में मदद करेंगी।

AI के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियमों की जरूरत
गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने SAMYAK पोर्टल के लॉन्च पर IDDRC को बधाई दी और इसे एक अनूठी पहल बताया। उन्होंने कहा कि कानूनी संस्थानों में AI को शामिल करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए। इन नियमों में यह साफ होना चाहिए कि किन कार्यों में AI का इस्तेमाल किया जा सकता है और किन मामलों में विवाद समाधान की प्रक्रिया को इंसानी निर्णय, समझ और विवेक के दायरे में ही रखा जाना चाहिए।

कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
समिट में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एम. आर. शाह और राजेश बिंदल के अलावा गुजरात स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन के चेयरमैन डॉ. के. जे. ठाकर, गुजरात हाई कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस सोनिया गोकानी और पूर्व चीफ जस्टिस डॉ. ए. सी. जोशी समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Ramkesh

Related News