जबरन धर्म परिवर्तन और शादी मामला, पाक कोर्ट ने पीड़िता हिंदू लड़की को लेकर सुनाया बड़ा फैसला
punjabkesari.in Tuesday, Sep 01, 2026 - 06:34 PM (IST)
Islamabad: पाकिस्तान में एक हिंदू युवती को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर घर से ले जाने, उस पर इस्लाम अपनाने और शादी करने के लिए दबाव डालने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। युवती ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपनी मर्जी से अपने माता-पिता के घर लौटना चाहती है। इसके बाद अदालत ने उसे उसके परिवार के पास भेजने का आदेश दिया। मामला सिंध प्रांत के संघार जिले की खिपरो तहसील का है। राणा राजपूत कॉलोनी में रहने वाली 21 वर्षीय रीता पिछले सप्ताह अपने घर से लापता हो गई थी।
रीता के भाई रविशंकर ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 24 अगस्त को कुछ अज्ञात लोग उनकी बहन को घर से ले गए। परिवार के अनुसार, घर की सीसीटीवी फुटेज में रीता को कुछ लोगों के साथ जाते हुए देखा गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वह अपने साथ कीमती सामान और मोबाइल फोन भी लेकर गई थी। परिवार का दावा है कि इसके बाद रीता को पंजाब के गुजरांवाला ले जाया गया। शिकायत के अनुसार, गुजरांवाला में रीता पर इस्लाम अपनाने और पहले से शादीशुदा नज़ीर हुसैन से शादी करने के लिए दबाव डाला गया।
हालांकि, बाद में पंजाब पुलिस ने रीता को बरामद कर लिया और सोमवार को उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। अदालत की कार्यवाही के दौरान जांच अधिकारी ने कहा कि रीता अपने माता-पिता के घर वापस नहीं जाना चाहती। इसलिए उसे सरकारी महिला आश्रय गृह दारुल-उल-अमान में रखने की मांग की गई।लेकिन रीता के वकीलों असद जमाल और खेता राम ने इस अनुरोध का विरोध किया। वकीलों ने अदालत को बताया कि रीता अपने भाई के साथ घर लौटना चाहती है और उसका भाई अदालत में मौजूद है।
मजिस्ट्रेट ने रीता को शपथ के तहत अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा। रीता ने अदालत में स्पष्ट कहा कि वह अपनी मर्जी से अपने माता-पिता के घर लौटना चाहती है। उसके बयान के बाद अदालत ने उसे उसके भाई के साथ जाने की अनुमति दे दी। साथ ही भाई को उसकी सुरक्षित अभिरक्षा और उसे संघार स्थित परिवार के घर तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह मामला पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के कथित जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के मामलों को लेकर लंबे समय से उठती चिंताओं के बीच सामने आया है। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग के अनुसार, देश में हर साल अल्पसंख्यक समुदायों की सैकड़ों लड़कियों को कथित तौर पर अपहरण, दबाव या जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के लिए मजबूर किए जाने के मामले सामने आते हैं।
