सोशल मीडिया का चैलेंज बना जानलेवा! 9 साल की बच्ची की हो गई मौत, कहीं आपका बच्चा तो नहीं कर रहा ये ट्रेंड फाॅलो?

punjabkesari.in Friday, Mar 20, 2026 - 05:34 PM (IST)

नेशनल डेस्क : सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले खतरनाक चैलेंज अब सिर्फ मनोरंजन नहीं रह गए हैं, बल्कि कई बार जानलेवा भी साबित हो रहे हैं। हाल ही में अमेरिका के टेक्सास में हुई एक दर्दनाक घटना ने इस खतरे को फिर से उजागर कर दिया है, जहां एक 9 साल की बच्ची की जान चली गई।

क्या था पूरा मामला?

टेक्सास की 9 वर्षीय बच्ची जैकलिन के ब्लैकवेल एक सोशल मीडिया चैलेंज में हिस्सा लेते हुए अपनी जान गंवा बैठी। इस चैलेंज को 'ब्लैकआउट' या 'चोकिंग चैलेंज' कहा जाता है, जिसमें बच्चे जानबूझकर अपनी सांस रोकने की कोशिश करते हैं ताकि वे कुछ समय के लिए बेहोश हो जाएं। इसी खतरनाक प्रयास के दौरान बच्ची की मौत हो गई।

सोशल मीडिया से मिली प्रेरणा

बताया जा रहा है कि बच्ची ने यह चैलेंज सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर सीखा था। उसने यह वीडियो अपनी दादी को भी दिखाया था, जिन्होंने उसे ऐसा न करने की सलाह दी थी। लेकिन बच्चों की जिज्ञासा और दोस्तों या वीडियो से प्रभावित होकर वे कई बार ऐसे जोखिम भरे कदम उठा लेते हैं।

घटना के दिन क्या हुआ?

घटना के दिन बच्ची सुबह स्कूल जाने से पहले घर के बाहर खेलने गई थी। अचानक घर में अजीब सी खामोशी महसूस होने पर उसके पिता बाहर गए, जहां उन्होंने अपनी बेटी को बेहोशी की हालत में पाया। उन्होंने तुरंत उसे बचाने की कोशिश की और CPR भी दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा क्यों जरूरी है?

आज के डिजिटल युग में बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना संभव नहीं है, लेकिन उनकी गतिविधियों पर नजर रखना बेहद जरूरी है। माता-पिता को यह देखना चाहिए कि बच्चा किस तरह का कंटेंट देख रहा है और किन चीजों से प्रभावित हो रहा है।

माता-पिता के लिए जरूरी सावधानियां

  • बच्चों से खुलकर बातचीत करें और उन्हें समझाएं कि कौन सी चीजें सुरक्षित हैं और कौन सी नहीं।
  • उनके मोबाइल और इंटरनेट उपयोग पर नजर रखें।
  • अगर बच्चे के व्यवहार में बदलाव दिखे या वह ज्यादा समय फोन पर बिताने लगे, तो सतर्क हो जाएं।
  • बच्चों को डराने के बजाय उन्हें सही और गलत की समझ दें।

एक गंभीर चेतावनी

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है। बच्चों की सुरक्षा के लिए माता-पिता की भूमिका सबसे अहम है, खासकर डिजिटल दुनिया में।


 


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Content Editor

Mehak

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