ऐसे कैसा होगा कोरोना से बचाव: 64% भारतीय भोजन से पहले साबुन से नहीं धोते हाथ

2020-03-26T08:40:54.913

नेशनल डेस्क: सरकार और विशेषज्ञ कोरोना वायरस से बचाव के लिए बुनियादी सुरक्षात्मक उपायों में से एक के रूप में साबुन और पानी से हाथ धोने की सलाह देते हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एन.एस.ओ.) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में यह एक आदत है जो ज्यादातर भारतीय आसानी से नहीं अपनाते। सर्वेक्षण के अनुसार यद्यपि अधिकांश घरों के सदस्य (99 प्रतिशत) भोजन से पहले अपने हाथ धोते हैं, केवल 35.8 प्रतिशत घरों में ही पानी और साबुन/डिटर्जैंट के साथ ऐसा होता है। पिछले साल नवम्बर में पेयजल, स्वच्छता और आवास स्थिति नामक एक रिपोर्ट में सर्वेक्षण के परिणामों को सार्वजनिक किया गया था, जिसमें 1,06,838 परिवार (ग्रामीण क्षेत्रों में 63,736 और शहरी क्षेत्रों में 43,102) शामिल हुए थे। सर्वेक्षण में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हाथ धोने की प्रथा में व्यापक अंतर पाया गया, 56 प्रतिशत शहरी परिवारों के सदस्यों ने खाने से पहले पानी और साबुन से हाथ धोने की सूचना दी थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 25.3 प्रतिशत परिवारों ने ऐसा किया था। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिन परिवारों के सदस्य झारखंड में भोजन करने से पहले पानी और साबुन/डिटर्जैंट से हाथ धोते हैं, वे झारखंड में सबसे कम (10.6 प्रतिशत) और सिक्किम में सबसे ज्यादा (87.1 प्रतिशत) हैं।

 

लगभग 60.4 प्रतिशत घरों में (69.9 प्रतिशत ग्रामीण और 42.1 प्रतिशत शहरी) लोग खाने से पहले अपने हाथ धोने के लिए केवल पानी का उपयोग करते हैं। लगभग 2.7 प्रतिशत घरों में (3.5 प्रतिशत ग्रामीण, 1.3 प्रतिशत शहरी) हाथ धोने के लिए ‘पानी और राख/ मिट्टी/ रेत’ आदि का उपयोग होता है। लगभग 1 प्रतिशत घर ऐसे थे, जहां भोजन से पहले हाथ नहीं धोए जाते थे। देश में कोविड-19 से निपटने के लिए हाथ की स्वच्छता का यह निम्न स्तर एक बड़ी चुनौती है। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने लोगों को बार-बार अपने हाथों को साबुन और पानी से धोने या अल्कोहल-आधारित हैंडरब के लिए वायरस को मारने का एक प्रभावी तरीका बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी लोगों को बार-बार हाथ धोने की सलाह दी है लेकिन विडम्बना तो यह है कि काफी अधिक संख्या में (74.1 प्रतिशत घरों में) लोगों ने ही बताया कि उन्होंने शौच के बाद ‘पानी और साबुन/डिटर्जैंट’ से हाथ धोए (68.8 प्रतिशत ग्रामीण परिवार और 88.3 प्रतिशत शहरी) हैं। 

 

साबुन कैसे मारता है वायरस: कोरोना वायरस से बचने का सबसे कारगर उपाय किसी से हाथ न मिलाना और अपने हाथों को साबुन/सैनीटाइजर के साथ बार-बार धोना सुझाया जा रहा है। साबुन के साथ हाथ धोने पर हाथों के साथ चिपके वायरस मर जाते हैं, लेकिन इन्हें मरने में कुछ समय लगता है। हाथों को साबुन से धोने और साबुन से वायरस कैसे मरते हैं तथा उन्हें मरने में कितना समय लगता है इस संबंध में वैज्ञानिक ने यह राय दी है:-

 

अब समझें साबुन कैसे काम करता है
कोरोना वायरस आसानी से हाथों, शरीर, कपड़े और कहीं भी चिपक सकता है। पानी से धोने पर वायरस अपना स्थान नहीं छोड़ता, क्योंकि यह पानी में नहीं घुलता है। उदाहरण के तौर पर एक गिलास या फ्लास्क में थोड़ा पानी लें और उसमें थोड़ा-सा तेल डालें। अब इस फ्लास्क को हिलाएं। आप देखेंगे कि पानी के ऊपर तेल की एक लेयर-सी बन गई है। इसका मतलब यह है कि तेल पानी में नहीं घुला। इसी तरह वायरस भी पानी में नहीं घुलता। अब इस फ्लास्क में कुछ बूंदें या चम्मच साबुन के डालें और फ्लासक को हिलाएं। आप देखेंगे कि पानी, तेल और साबुन के आपस में मिल जाने पर झाग उत्पन्न हो गई है। इसका कारण साबुन में दो तरह के मॉलीक्यूल्स का होना है। एक जो पानी को अपनी ओर आकर्षित करता है और दूसरा जो फैट को अपनी ओर आकर्षित करता है, इसलिए जब साबुन पानी के संपर्क में आता है तो यह पानी और फैट को अपनी तरफ आकर्षित करता है तथा साबुन के संपर्क में आने पर फैट के मॉलीक्यूल टूट जाते हैं व उसका चिपचिपापन खत्म हो जाता है। ठीक इसी प्रकार जब वायरस हाथों से चिपका होता है तो साबुन के संपर्क  में आने के बाद इसकी आऊटर मैंबरेन (प्रोटीन) टूट जाती है और वायरस के अंदर के तत्व मर जाते हैं।

 

कितना समय लगता है हाथों से चिपके वायरस को मरने में
एक बार जब वायरस हाथों के साथ चिपक जाए तो यह आसानी से नहीं मरता। पानी से तो लगभग नहीं, मगर जब वायरस साबुन के संपर्क में आता है तो इसको मरने में 20 सैकेंड तक का समय लग जाता है। कैमिकल रिएक्शन के समयानुसार 5 या 10 सैकेंड में वायरस नहीं मरता। उसके मॉलीक्यूल्स टूटने में 20 सैकेंड लग जाते हैं। इसी तरह जब हम सैनीटाइजर का इस्तेमाल करते हैं तो सैनीटाइजर में मौजूद इथाइल अल्कोहल वायरस की आऊटर मैंबरेन तोड़ देता है जिससे कुछ सैकेंड के बाद वायरस खत्म हो जाता है। 

 

वायरस का स्ट्रक्चर
साबुन के साथ वायरस कैसे मरता है इसके लिए सबसे पहले हमें इसका स्ट्रक्चर समझना होगा। साधारण तौर पर एक वायरस के आऊटर मैंबरेन, इनर मैंबरेन, कोर वाल, कोर, डी.एन.ए. जिनोम, वायरिन एंजाइम और न्यूक्लोटाइड्स इत्यादि तत्व होते हैं। हरेक वायरस का स्ट्रक्चर अलग-अलग होता है।  आऊटर मैंबरेन एक तरह से प्रोटीन का सर्कल होता है, जो बाकी तत्वों के लिए कवच का काम करता है।  


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