पुराना राज बना मुसीबत: 30 साल से US में बसे भारतीय पर गिरी गाज, छिन जाएगी अमेरिकी नागरिकता
punjabkesari.in Wednesday, Aug 12, 2026 - 02:44 PM (IST)
Washington: अमेरिका में भारतीय मूल के एक व्यक्ति की करीब तीन दशक पुरानी इमिग्रेशन कहानी अब उसकी नागरिकता पर भारी पड़ सकती है। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि हरिंदर सिंह ने अलग पहचान का इस्तेमाल किया और अपनी पिछली इमिग्रेशन हिस्ट्री से जुड़ी अहम जानकारी छिपाकर अमेरिकी नागरिकता हासिल की। अब अमेरिकी सरकार ने उसकी नागरिकता रद्द कराने के लिए संघीय अदालत में सिविल मुकदमा दायर किया है। अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के अनुसार, हरिंदर सिंह, जिन्हें हरिंदर सिंह संघेरा और रशपाल सिंह (Rushpal Singh) नामों से भी जाना जाता है, 1991 में अमेरिका पहुंचे थे। उन्हें उस समय न्यूयॉर्क के JFK एयरपोर्ट पर अमेरिकी इमिग्रेशन एंड नेचुरलाइज़ेशन सर्विस (INS) ने रोका था। अधिकारियों के मुताबिक उस समय उन्होंने अपनी पहचान Rushpal Singh के रूप में बताई थी।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 1995 में सिंह को अमेरिका से निर्वासित करने का आदेश दिया गया था। हालांकि सरकार के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है कि वह उस आदेश के तहत अमेरिका से बाहर गया था। इसके बाद मामले में नया मोड़ आया। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि जून 1996 में सिंह ने INS के सामने इमिग्रेशन लाभ के लिए आवेदन किया और इस बार Harinder Singh नाम का इस्तेमाल किया। सरकार के मुताबिक इस आवेदन में उन्होंने अपनी जन्मतिथि, अमेरिका में प्रवेश की तारीख और इमिग्रेशन क्लेम के आधार से जुड़ी जानकारी भी अलग दी। अधिकारियों का आरोप है कि इस तरह उन्होंने अपनी पुरानी इमिग्रेशन हिस्ट्री को छिपाया।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि बाद में हरिंदर सिंह के नाम से उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया और 2000 तक उन्हें Lawful Permanent Resident यानी ग्रीन कार्ड धारक का दर्जा मिल गया। इसके करीब आठ साल बाद, 2008 में वह अमेरिकी नागरिक बन गए। अब अमेरिकी सरकार का कहना है कि नागरिकता के लिए आवेदन करते समय उन्होंने अपनी पहले की इमिग्रेशन हिस्ट्री और दूसरी पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने नहीं रखी। अमेरिकी सरकार ने अब संघीय अदालत में नागरिकता रद्द करने का दीवानी मुकदमा दाखिल किया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य सिंह को अमेरिकी नागरिकता देने वाले आदेश को रद्द कराना और उनका देशीकरण का प्रमाणपत्र (Certificate of Naturalization) निरस्त करना है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह अभी सरकार द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित सिविल कानूनी कार्रवाई है। अंतिम फैसला अदालत करेगी।
अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, 20 जनवरी 2025 से अब तक करीब 123 नागरिकता रद्द करने का दीवानी मुकदमे (civil denaturalisation complaints) दाखिल की जा चुकी हैं। न्याय विभाग ने इसे रिकॉर्ड में अब तक की सबसे बड़ी संख्या बताया है। Denaturalisation का मतलब ऐसी कानूनी प्रक्रिया है जिसके जरिए किसी व्यक्ति की पहले से मिली अमेरिकी नागरिकता को रद्द करने की मांग की जाती है, खासकर जब सरकार आरोप लगाए कि नागरिकता हासिल करते समय धोखाधड़ी, गलत जानकारी या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए थे।इसी तरह की कार्रवाई का सामना Debashis Ghosh भी कर रहे हैं। उनका आखिरी ज्ञात निवास Illinois के Cook County में बताया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, घोस 1991 से कई बार अलग-अलग non-immigrant visas पर अमेरिका आए थे और 2012 में अमेरिकी नागरिक बने। मई 2026 से उनके खिलाफ भी नागरिकता रद्द करने की कार्यवाही चल रही हैं।
