PM शहबाज़ का कबूलनामा:“कर्ज़ में जकड़ा पाकिस्तान, मैं और आर्मी चीफ मुनीर दुनिया भर में मांग रहे भीख”(Video)
punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 12:32 PM (IST)
Islamabad: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने देश की बिगड़ती आर्थिक हालत पर एक असामान्य और तीखा बयान देते हुए स्वीकार किया है कि विदेशी कर्ज़ के लिए दुनिया भर में हाथ फैलाना पाकिस्तान के लिए अपमानजनक स्थिति बन चुका है। इस्लामाबाद में निर्यातकों और उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए शहबाज़ शरीफ ने कहा, “जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और मैं दुनिया भर में पैसे के लिए भीख मांगते फिरते हैं, तो हमें शर्म आती है। कर्ज़ लेना हमारे आत्मसम्मान पर बहुत बड़ा बोझ है।” पाकिस्तान इस समय गंभीर ऋण संकट से गुजर रहा है। मार्च 2025 तक देश पर कुल सार्वजनिक कर्ज़ 76,000 अरब पाकिस्तानी रुपये से अधिक हो चुका है, जो केवल चार वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है। पाकिस्तान इस समय 23वें IMF कार्यक्रम पर निर्भर है।
Pak PM Shehbaz Sharif admits hard facts:
— Dwight Schrute (@schrute91) January 30, 2026
“We feel ashamed when Field Marshal Asim Munir and I go around the world BEGGING for money. Taking loans is a huge burden on our self-respect. Our heads bow down in shame.”
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पाकिस्तान की आर्थिक जीवनरेखा मुख्यतः इन देशों पर टिकी है:
- चीन: 2024–25 में लगभग 4 अरब डॉलर के सुरक्षित डिपॉज़िट रोलओवर, CPEC के तहत 60 अरब डॉलर से अधिक निवेश।
- सऊदी अरब: 3 अरब डॉलर की जमा राशि, 1.2 अरब डॉलर का स्थगित तेल भुगतान, 5–25 अरब डॉलर के संभावित निवेश।
- UAE: 2 अरब डॉलर का ऋण रोलओवर, ऊर्जा और बंदरगाह क्षेत्रों में 10–25 अरब डॉलर के निवेश की योजना।
- कतर: 3 अरब डॉलर निवेश प्रोटोकॉल, LNG आपूर्ति में अहम भूमिका।
पाकिस्तान में गरीबी बढ़कर लगभग 45% आबादी तक पहुंच गई है। अत्यधिक गरीबी 4.9% से बढ़कर 16.5% हो चुकी है। बेरोज़गारी दर 7.1% है, 80 लाख से अधिक लोग नौकरी से बाहर हैं। कार्यबल का 85% हिस्सा असंगठित क्षेत्र में फंसा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान ने वियतनाम या बांग्लादेश की तरह निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने के बजाय कर्ज़ से मिली “हॉट मनी” का इस्तेमाल कृत्रिम मुद्रा नियंत्रण और अभिजात वर्ग की खपत में किया।
कर्ज़ वार्ताओं में सेना प्रमुख की सक्रिय भूमिका यह संकेत देती है कि लेनदारों को भरोसा दिलाने के लिए पाकिस्तान सैन्य प्रतिष्ठान को “गारंटर” के रूप में पेश कर रहा है, जिससे नागरिक शासन और सेना की सीमाएं और धुंधली हो रही हैं। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप के कथित “Board of Peace” में स्थान पाने के लिए भारी राशि खर्च किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि जब जनता महंगाई और ऊर्जा संकट से जूझ रही है, तब प्राथमिकताएं क्या हैं। विश्लेषकों के अनुसार, शहबाज़ शरीफ का यह बयान केवल एक स्वीकारोक्ति नहीं, बल्कि पाकिस्तान की स्थायी संरचनात्मक कमजोरी का खुला प्रमाण है।
