US-Iran जंग में खतरनाक मोड़: IRGC ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर दागीं मिसाइलें, जवाब में अमेरिका ने 3 ईरानी तेल टैंकर उड़ाए
punjabkesari.in Sunday, Sep 06, 2026 - 12:20 PM (IST)
Washington: अमेरिका और ईरान के बीच छह महीने से जारी संघर्ष एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को कहा कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने क्षेत्र में तैनात एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और एक गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया। सैन्य टकराव के साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही कूटनीतिक कोशिशें भी अटक गई हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से ईरान पर परमाणु दायित्वों के पालन को लेकर दबाव बढ़ाया जा रहा है, जबकि तेहरान ने भी पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी जहाजों ने कई मिसाइल हमलों से खुद को बचा लिया और किसी अमेरिकी कर्मी के घायल होने की सूचना नहीं है। दूसरी तरफ, ईरान के IRGC ने दावा किया है कि उसके मिसाइल हमले में दोनों अमेरिकी युद्धपोतों को नुकसान पहुंचा और वे मुठभेड़ वाले इलाके से हट गए। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
US claims it struck three Iranian oil tankers in the strait of Hormuz today, in response to an IRGC attack involving ballistic missiles fired at 2 US warships.
— Current Report (@Currentreport1) September 5, 2026
Iran may perhaps still try to target US warships, but it would have to factor in the cost of a possible US response.… pic.twitter.com/MS05NnvsQz
CENTCOM ने बताया कि अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों पर कार्रवाई की। इनमें M/T Downy को खार्ग द्वीप के पास और M/T Stark 1 को जास्क के नजदीक निशाना बनाया गया। तीसरे जहाज M/T Kylo पर ओमान की खाड़ी में हमला किया गया। अमेरिका के मुताबिक, पहले दो टैंकरों को स्थायी रूप से निष्क्रिय कर दिया गया, जबकि खाली तीसरे टैंकर को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया गया। बाद में CENTCOM ने बताया कि M/T Kylo डूब गया। उसके चालक दल को जहाज छोड़ने का निर्देश दिया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों की रक्षा करने में पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर ईरान के सीमित और खुले तेल बेड़े को नष्ट किया जा सकता है।अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि अगर ईरान अमेरिकी जहाजों पर हमला करता है तो अमेरिका उसके तेल टैंकरों को निशाना बनाएगा।
ईरान का पलटवार का दावा
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरानी IRGC ने कहा कि उसने तीन तेल टैंकरों और तीन अमेरिकी या अमेरिकी-संबद्ध जहाजों को निशाना बनाया। हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने इन जवाबी हमलों की तत्काल पुष्टि नहीं की है।ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ईरानी जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखता है तो अमेरिकी सैन्य जहाजों पर इससे भी ज्यादा गंभीर हमले किए जाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण विवाद अमेरिकी विमानवाहक पोत को लेकर है। ईरान का दावा है कि उसके बैलिस्टिक मिसाइल हमले से अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और विध्वंसक को नुकसान पहुंचा और दोनों पीछे हट गए। वहीं अमेरिकी सेना का कहना है कि दोनों युद्धपोतों ने मिसाइलों को सफलतापूर्वक चकमा दिया और किसी अमेरिकी सैन्यकर्मी को चोट नहीं लगी। इसलिए फिलहाल दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर है।
खार्ग द्वीप और होर्मुज बना सबसे बड़ा तनाव केंद्र
अमेरिकी हमलों में से एक खार्ग द्वीप के पास हुआ। यह ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है और देश के तेल कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा जास्क और ओमान की खाड़ी में भी कार्रवाई हुई। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य इस संघर्ष का सबसे संवेदनशील मोर्चा बना हुआ है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों के बीच समुद्री टकराव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है और इन्हें ‘युद्ध अपराध’ बताया है। तेहरान ने कहा है कि अमेरिका की सैन्य और आर्थिक कार्रवाई के परिणामों की जिम्मेदारी वॉशिंगटन और उसके सहयोगियों की होगी।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फरवरी 2026 में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद शुरू हुआ था। बीच में तनाव कुछ समय के लिए कम हुआ, लेकिन पिछले करीब एक सप्ताह में दोनों देशों के बीच हमले फिर तेज हो गए हैं। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के तटीय इलाकों में तनाव बढ़ा है।
और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों, वैश्विक शिपिंग और मध्य पूर्व की सुरक्षा पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
