ईरान में IRGC के ठिकानों पर अमेरिका का हमला, हॉर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
punjabkesari.in Tuesday, Sep 01, 2026 - 10:33 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह महीनों से चल रहा संघर्ष एक बार फिर भीषण सैन्य टकराव में बदल गया है। मंगलवार को अमेरिकी सेना ने ईरान में सक्रिय 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। वॉशिंगटन के अनुसार, यह बड़ी कार्रवाई हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर ईरान समर्थित IRGC के हमलों के जवाब में की गई है हालांकि, अमेरिकी हमलों में हुए नुकसान, सटीक ठिकानों और हताहतों की विस्तृत जानकारी अभी आना बाकी है।
महीने भर की शांति के बाद सीधे सैन्य टकराव
यह ताजा हमला हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी रॉकेट लॉन्चरों पर अमेरिकी हमले के ठीक दो दिन बाद हुआ है, जिसने पिछले एक महीने से बनी शांति को पूरी तरह खत्म कर दिया है। ईरान ने रविवार को अमेरिकी कार्रवाई को "घातक हमला" करार देते हुए जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर जवाबी कार्रवाई की थी। जॉर्डन के रक्षा विभाग का दावा है कि उसने सोमवार तड़के अपनी हवाई सीमा में घुसने वाली आठ बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।
समुद्री बारूदी सुरंगों से हमले की थी तैयारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खुलासा किया है कि IRGC बल हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ऐसे रॉकेट दागने की तैयारी कर रहे थे, जो समुद्री बारूदी सुरंगों (sea mines) से लैस थे। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी हमलों में अपने सैनिकों की मौत की पुष्टि की है और चेतावनी दी है कि वॉशिंगटन को इसके गंभीर सैन्य और आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।
ट्रंप की रणनीति पर फिरा पानी, तेल मार्ग पर संकट गहराया
यह सैन्य टकराव ऐसे समय में दोबारा शुरू हुआ है जब ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया था कि वह तेहरान पर सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव बनाने की नीति पर ध्यान केंद्रित करेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 जुलाई को दर्जनों IRGC ठिकानों पर हुए हमलों के बाद नए हमलों पर रोक लगा दी थी।
इस पूरे विवाद के केंद्र में हॉर्मुज जलडमरूमध्य है, जिससे होकर दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि यह जलमार्ग सुरक्षित और खुला है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि युद्ध के कारण इस मार्ग से व्यावसायिक जहाजों का आवागमन युद्ध-पूर्व स्तर की तुलना में बेहद कम हो चुका है। ताजा सैन्य हमलों ने क्षेत्र को फिर से अनिश्चितता और युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
