ईरान की अमेरिका-इजराइल को खुली धमकी, कहा-फिर ललकारा तो चखाएंगे हार का कड़वा स्वाद

punjabkesari.in Monday, Sep 21, 2026 - 07:15 PM (IST)

Tehran: अमेरिका और इजराइल के साथ जारी सैन्य टकराव के बीच ईरान के सैन्य नेतृत्व ने दोनों देशों को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खतम-अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि अगर विदेशी ताकतों ने ईरान को चुनौती दी तो उन्हें “और हार का कड़वा स्वाद” चखना पड़ेगा। बयान को ईरानी समाचार एजेंसी आईएसएनए ने प्रकाशित किया है। यह बयान ईरान के वार्षिक ‘पवित्र रक्षा सप्ताह’ के मौके पर जारी किया गया। यह सप्ताह 1980 से 1988 के बीच चले ईरान-इराक युद्ध की स्मृति से जुड़ा है। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने इस दौरान देश की सीमाओं, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

 

संयुक्त बयान में ईरान की सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, रक्षा मंत्रालय, बसीज और सीमा सुरक्षा बलों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ये सभी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेंगे। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने अपने बयान में दावा किया कि हालिया संघर्षों ने उसकी सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूत किया है। बयान में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया गया और दावा किया गया कि हालिया टकरावों में दोनों को पीछे हटना पड़ा। हालांकि, अमेरिका और इजराइल की हार या ईरान के उन्हें “घुटने टेकने” पर मजबूर करने का दावा ईरानी सैन्य नेतृत्व का अपना आकलन है, जिसे स्वतंत्र तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

 

ईरानी सैन्य बयान में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का भी खास तौर पर उल्लेख किया गया। बयान में दावा किया गया कि ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के प्रबंधन पर अपनी व्यवस्था स्थापित कर क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण बदल दिए हैं। हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। हाल के महीनों में अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण यहां से तेल और अन्य जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। अमेरिका ने भी जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए सैन्य सहायता और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है।  ईरानी सैन्य नेतृत्व ने 1980-1988 के ईरान-इराक युद्ध को अपनी मौजूदा सैन्य क्षमता के विकास की महत्वपूर्ण वजह बताया। बयान में कहा गया कि उस युद्ध से मिले अनुभवों ने ईरान को रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भर बनने और अपनी सैन्य तकनीक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ाया। ईरान का कहना है कि स्वदेशी सैन्य तकनीक, रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता और आधुनिक हथियार प्रणालियों ने उसकी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया है।

 


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Content Writer

Tanuja

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