डरावने इतिहास की वापसी! US पहले भी कई देशों पर आक्रमण कर पलट चुका सत्ता, वेनेजुएला मामला कुछ अलग व गंभीर चेतावनी
punjabkesari.in Monday, Jan 05, 2026 - 03:33 PM (IST)
Wahington:अमेरिका के विशेष बलों द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को राजधानी कराकास स्थित उनके आवास से हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क ले जाना, केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस अमेरिका में मादक पदार्थ-आतंकवाद से जुड़े आरोपों में मुकदमे का सामना करेंगे। लातिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेपों का इतिहास पुराना है।
आमतौर पर अमेरिका किसी नेता को ‘अस्वीकार्य’ मानते हुए सैन्य शक्ति का प्रयोग करता रहा है और रातोंरात सत्ता परिवर्तन करा देता रहा है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, वेनेजुएला का मामला इन सबसे अलग और कहीं अधिक चिंताजनक है। इस बार अमेरिका ने महीनों तक बार-बार बदलते कारणों के आधार पर सैन्य कार्रवाई की तैयारी की। इन अभियानों के समर्थन में ठोस सबूत कम और बयानबाज़ी ज्यादा रही। यही वजह है कि कई विद्वानों का मानना है कि यह ऑपरेशन उस समय हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय कानून पहले ही गहरे संकट में है।
इतिहास गवाह है कि वेनेजुएला पहला देश नहीं है जहां अमेरिकी दखल से सत्ता बदली गई।
- 1953 में ब्रिटेन ने ब्रिटिश गुयाना (अब गुयाना) में चुनी हुई सरकार गिरा दी।
- 1965 में अमेरिका ने डोमिनिकन गणराज्य में 22,000 सैनिक भेजे।
- 1983 में ग्रेनाडा पर हमला हुआ।
- 1989 में पनामा पर आक्रमण कर जनरल नोरिएगा को अमेरिका ले जाया गया।
- 2004 में हैती के राष्ट्रपति जीन-बर्त्रेंड एरीस्टिड को सत्ता से हटाया गया।
लेकिन 2026 का वेनेजुएला इन सभी से अलग है। यह लगभग तीन करोड़ आबादी वाला बड़ा देश है, जिसके पास संगठित और लंबे समय से तैयार सशस्त्र बल हैं। साथ ही यह कार्रवाई ऐसे वैश्विक माहौल में हुई है, जहां विभिन्न विचारधाराओं वाले देश भी अमेरिका की आलोचना कर रहे हैं।
- कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इसे लातिन अमेरिका की संप्रभुता पर हमला बताया।
- ब्राजील के राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा ने कहा कि अमेरिका ने “अस्वीकार्य सीमा” पार कर दी है।
- मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शिनबॉम ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन कहा।
- यहां तक कि अमेरिका के करीबी सहयोगी भी असहज दिखे।
- फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा कि यह कार्रवाई “बल प्रयोग न करने के सिद्धांत” के खिलाफ है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून की बुनियाद है।
- संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी इस “खतरनाक चलन” पर गहरी चिंता जताई।
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के अनुसार, किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग प्रतिबंधित है।
खतरे में वैश्विक व्यवस्था
इस कार्रवाई के बाद कोलंबिया ने वेनेजुएला सीमा पर सेना तैनात कर दी है, जबकि गुयाना ने सुरक्षा योजनाएं सक्रिय कर दी हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला को तब तक “चलाता” करेगा जब तक सुरक्षित सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता। विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या अमेरिका इतनी लंबी प्रतिबद्धता निभा पाएगा।वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने इसे “आपराधिक आक्रमण” बताते हुए विरोध जारी रखने की बात कही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सबसे बड़ा खतरा यह है कि अगर एक देश बिना कानूनी अनुमति के दूसरे देश के राष्ट्रपति को उठा सकता है, तो वैश्विक व्यवस्था को कैसे सुरक्षित रखा जा सकेगा।
