तालिबान ने पेश किया नया कानून, 'पत्नियों और महिलाओं की पिटाई घरेलू हिंसा नहीं, बस हड्डी नहीं टूटनी चाहिए'
punjabkesari.in Thursday, Feb 19, 2026 - 11:44 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्कः अफगानिस्तान में सत्तारूढ़ Taliban ने महिलाओं से जुड़े मामलों पर एक नया दंड कानून पेश किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इस नए कानून में कहा गया है कि अगर पति अपनी पत्नी या बच्चों को मारता है, लेकिन उनकी हड्डी नहीं टूटती और खुली चोट नहीं आती, तो इसे घरेलू हिंसा नहीं माना जाएगा।
यह फैसला सामने आते ही मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में खलबली मच गई है।
क्या कहता है नया दंड कानून?
यह 90 पन्नों की नई दंड संहिता अफगानिस्तान के सर्वोच्च नेता Hibatullah Akhundzada के हस्ताक्षर से जारी की गई है। कानून में कहा गया है कि पति अपनी पत्नी और बच्चों को “शारीरिक दंड” दे सकता है। शर्त यह है कि हड्डी न टूटे और खुली या गंभीर चोट न आए।अगर “अत्यधिक बल प्रयोग” से फ्रैक्चर या स्पष्ट चोट होती है, तो अधिकतम 15 दिन की जेल हो सकती है। महिला को अदालत में खुद यह साबित करना होगा कि उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ है।
अदालत में चोटें दिखाना होगा जरूरी
कानून के मुताबिक, अगर कोई महिला शिकायत करती है तो उसे जज के सामने अपनी चोटें दिखानी होंगी। अदालत में उसके साथ उसका पति या कोई पुरुष अभिभावक मौजूद होना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इससे महिलाओं पर कानूनी और सामाजिक दबाव बढ़ सकता है।
समाज को चार वर्गों में बांटने का प्रावधान
नए कानून के अनुच्छेद 9 के तहत अफगान समाज को चार श्रेणियों में बांटा गया है:
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धार्मिक विद्वान (उलेमा)
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कुलीन वर्ग (अशरफ)
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मध्यम वर्ग
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निम्न वर्ग
इस व्यवस्था के अनुसार, सजा अपराध की गंभीरता से ज्यादा आरोपी की सामाजिक स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर कोई धार्मिक विद्वान अपराध करता है, तो उसे केवल सलाह दी जाएगी। कुलीन वर्ग के व्यक्ति को अदालत में बुलाकर चेतावनी दी जाएगी। मध्यम वर्ग के लिए जेल की सजा तय है। निम्न वर्ग के लोगों को जेल के साथ शारीरिक दंड भी दिया जा सकता है। इसके अलावा गंभीर अपराधों में शारीरिक सजा इस्लामी धर्मगुरु देंगे, न कि सामान्य सुधार सेवाएं।
2009 का महिला सुरक्षा कानून खत्म
इस नई संहिता के लागू होने के साथ ही 2009 में लाया गया महिलाओं के खिलाफ हिंसा उन्मूलन कानून (EVAW) रद्द कर दिया गया है। यह कानून पूर्व अमेरिका-समर्थित सरकार के समय लागू हुआ था और इसका उद्देश्य महिलाओं को घरेलू हिंसा से कानूनी सुरक्षा देना था।
कानून पर चर्चा करना भी अपराध
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान ने यह भी फैसला किया है कि इस नए कानून पर सार्वजनिक चर्चा करना भी अपराध माना जाएगा। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि लोग इस कानून के खिलाफ बोलने से डर रहे हैं, यहां तक कि गुमनाम रूप से भी विरोध करने से बच रहे हैं।
रिश्तेदारों से मिलने पर भी जेल का प्रावधान
नई संहिता में एक और सख्त प्रावधान जोड़ा गया है: अगर कोई विवाहित महिला अपने पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने जाती है, तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता
इस नए कानून को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता जताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों को और सीमित करता है और घरेलू हिंसा को कानूनी मान्यता देता है। अफगानिस्तान में पहले से ही महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर कई प्रतिबंध लगे हुए हैं। ऐसे में यह नया कानून महिलाओं की स्थिति को और कमजोर कर सकता है।
