जंग से संवाद की ओर: अमेरिका-ईरान वार्ता पर दुनिया की नजर, ईरानी दल भी पहुंचा स्विट्जरलैंड

punjabkesari.in Sunday, Jun 21, 2026 - 03:06 PM (IST)

International Desk: मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ईरान का प्रतिनिधिमंडल शनिवार देर रात स्विट्जरलैंड पहुंच गया। यहां अमेरिका और ईरान के बीच बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में महत्वपूर्ण वार्ता होने वाली है। Switzerland के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच X पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आगमन का स्वागत करते हुए कहा कि यह दल अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के क्रियान्वयन से जुड़ी वार्ताओं के लिए बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट की ओर रवाना हो चुका है।

 

ईरान के सरकारी प्रसारक Islamic Republic of Iran Broadcasting के अनुसार, "मिनाब 168" कोडनाम वाला ईरानी वार्ता दल स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है और जल्द ही बातचीत शुरू होने की उम्मीद है। स्विस सरकार ने कहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के लिए एक "गोपनीय और विश्वसनीय मंच" उपलब्ध कराना जारी रखेगी। प्रारंभिक वार्ता शुक्रवार को शुरू होनी थी, लेकिन बाद में इसे स्थगित कर दिया गया था।

 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance भी वार्ता में भाग लेने के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो गए हैं। रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बातचीत से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और लेबनान में लागू नाजुक युद्धविराम को बनाए रखने के मुद्दे पर प्रगति होगी। "हमें उम्मीद है कि परमाणु मुद्दे पर और लेबनान युद्धविराम के मुद्दे पर प्रगति होगी। यही दो बड़े विषय हैं जिन पर हमारा मुख्य ध्यान रहेगा। निश्चित रूप से ईरान भी अपने कुछ मुद्दे उठाएगा।" उन्होंने बताया कि विभिन्न देशों के तकनीकी विशेषज्ञ पहले ही वार्ता स्थल पर पहुंच चुके हैं और बातचीत कई दिनों तक चल सकती है।

इन मुद्दों पर होगी चर्चा 

  • वार्ता में मुख्य रूप से इन विषयों पर चर्चा होने की संभावना है ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण
  • उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम भंडार का भविष्य
  • लेबनान में युद्धविराम व्यवस्था को मजबूत करना
  • क्षेत्रीय तनाव कम करने के उपाय
  • प्रतिबंधों में संभावित राहत और आर्थिक सहयोग

 

यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को कम करने के प्रयास तेज हुए हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता सफल रहती है तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों में सुधार आ सकता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता और ऊर्जा बाजारों को भी राहत मिल सकती है।

 


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Content Writer

Tanuja

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