सऊदी अरब में दिखा रमजान का चांद, कल रहेगा पहला रोजा, जानें भारत में कब से शुरू होगा?

punjabkesari.in Tuesday, Feb 17, 2026 - 10:58 PM (IST)

इंटरनेशनल डेस्कः सऊदी अरब में रमजान का चांद नजर आ गया है। इसके साथ ही इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना रमजान आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। रमजान 1447 हिजरी (2026) का पहला दिन बुधवार, 18 फरवरी 2026 को होगा। रमजान इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर का नौवां महीना होता है और इसे इबादत, रोजा, दुआ और आत्मचिंतन का महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं और ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में बिताते हैं।


शाबान के महीने के बाद शुरू होता है रमजान

रमजान की शुरुआत इस्लामी महीने शाबान के खत्म होने के बाद होती है। खाड़ी देशों में चांद दिखने के साथ ही रमजान की शुरुआत हो गई है और वहां 18 फरवरी से पहला रोजा रखा जाएगा।


भारत में कब रखा जाएगा पहला रोजा?

भारत में आमतौर पर सऊदी अरब में चांद दिखने के लगभग 24 घंटे बाद चांद नजर आता है। इस बार 17 फरवरी को अमावस्या (नया चांद बनने का दिन) है। इस वजह से भारत में उसी दिन चांद दिखना संभव नहीं है। ऐसे में संभावना है कि भारत में 18 या 19 फरवरी को चांद नजर आए। अगर 18 फरवरी की शाम चांद दिखाई देता है, तो भारत में पहला रोजा 19 फरवरी से रखा जाएगा। अंतिम फैसला स्थानीय चांद देखने वाली समितियों और धार्मिक संगठनों की घोषणा के बाद ही होगा।

सऊदी सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे चांद देखने के निर्देश

सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार की शाम 17 फरवरी 2026 को शाबान के 29वें दिन चांद के दीदार के आदेश दिए हैं। इसके बाद मगरिब की नमाज के बाद लोग चांद को देख सकेंगे और अगले दिन पूरे महीने के लिए रोजा रखकर खुदा से इबादत कर सकेंगे।

चांद के आधार पर तय होती है रमजान की तारीख

इस्लाम में महीनों की गणना चांद के हिसाब से होती है। चांद के घटने-बढ़ने के आधार पर नया महीना शुरू होता है। इसी वजह से रमजान की तारीख हर साल ग्रेगोरियन (अंग्रेजी) कैलेंडर में बदलती रहती है। जिस दिन चांद दिखाई देता है, उसके अगले दिन से रोजा रखा जाता है। इसलिए अलग-अलग देशों में चांद दिखने के समय के अनुसार रमजान एक दिन आगे-पीछे शुरू हो सकता है।

रमजान का महत्व

रमजान को सब्र, त्याग और आध्यात्मिक शुद्धि का महीना माना जाता है।

  • सूर्योदय से पहले सहरी की जाती है।

  • सूर्यास्त के बाद इफ्तार किया जाता है।

  • रात में तरावीह की नमाज अदा की जाती है।

  • जरूरतमंदों को जकात और सदका दिया जाता है।

पूरे महीने इबादत और नेक कामों पर खास जोर दिया जाता है।


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Content Writer

Pardeep

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