बांग्लादेश में अब रहमान सरकार… भारत को क्या फायदा और पाकिस्तान को क्यों झटका?
punjabkesari.in Saturday, Feb 14, 2026 - 12:19 AM (IST)
इंटरनेशनल डेस्कः बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहली बार लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव हुए। इस चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को भारी बहुमत मिला है। पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान अब देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।
अब सवाल उठ रहा है कि इस बदलाव से भारत को क्या फायदा होगा और पाकिस्तान को क्यों झटका लग सकता है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
चुनाव में किसे फायदा, किसे नुकसान?
इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश और छात्र नेताओं की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) को लगा। ये वही छात्र नेता और जमात से जुड़े समूह थे जिन्होंने शेख हसीना की सरकार के खिलाफ आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी। लेकिन चुनाव में जनता ने उन्हें ज्यादा समर्थन नहीं दिया। मोहम्मद यूनुस, जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है, इस राजनीतिक बदलाव में कमजोर साबित हुए। वे पहले अंतरिम दौर में प्रभावशाली माने जा रहे थे, लेकिन चुनाव में उनकी भूमिका सीमित रह गई।
पाकिस्तान को क्यों लग सकता है झटका?
चुनाव के दौरान आरोप लगे कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BNP की जीत से पाकिस्तान समर्थक माने जाने वाले समूहों को बड़ा नुकसान हुआ है।
अगर BNP भारत के साथ संबंध सुधारती है, तो यह पाकिस्तान के लिए रणनीतिक झटका हो सकता है।
भारत को क्या फायदा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को फोन कर जीत की बधाई दी और दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की बात कही। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी उन्हें बधाई दी। BNP ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया है कि वह अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाएगी। बांग्लादेश में लगभग 8% हिंदू आबादी है। इस बार हिंदू बहुल सीटों पर BNP को बड़ा समर्थन मिला। अगर नई सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है और भारत के साथ संतुलित विदेश नीति अपनाती है, तो इससे भारत-बांग्लादेश संबंध मजबूत हो सकते हैं।
चुनाव नतीजों के अहम बिंदु
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लगभग 20 साल बाद BNP को पूर्ण बहुमत मिला है।
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35 साल बाद कोई पुरुष नेता लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री बनेगा।
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299 सीटों में से BNP गठबंधन को 212 सीटें मिलीं, जो बहुमत के लिए जरूरी 150 से काफी ज्यादा हैं।
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जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को 77 सीटें मिलीं।
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NCP सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गई।
हिंदुओं के लिए हालात बदल सकते हैं?
पिछले दो सालों में बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाएं सामने आईं। कई हिंदुओं की हत्या, घरों में आगजनी और मंदिरों में तोड़फोड़ की खबरें आईं। 2025 में 522 सांप्रदायिक हमलों और 61 मौतों की बात सामने आई। चुनाव से पहले भी कई हत्याएं हुईं — जैसे रतन साहूकार, सुशेन चंद्र सरकार, चंचल चंद्र भौमिक और लिटन घोष की हत्या की घटनाएं चर्चा में रहीं। BNP ने वादा किया है कि वह हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की जान-माल और पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। अगर यह वादा पूरा होता है, तो हालात में सुधार हो सकता है।
BNP की जीत की बड़ी वजहें
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खालिदा जिया के निधन के बाद सहानुभूति की लहर
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अवामी लीग का चुनाव न लड़ना
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छात्र नेताओं और जमात से जनता की नाराजगी
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हिंदू मतदाताओं का BNP की ओर झुकाव
