मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए भारत में निकट भविष्य में और राजकोषीय समर्थन की गुंजाइश: मुद्राकोष

punjabkesari.in Friday, Jul 10, 2020 - 08:07 PM (IST)

वाशिंगटन, 10 जुलाई (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भारत में कोविड-19 महामारी के कारण मौजूदा कठिन आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए हुए खासकर वंचित परिवारों और एसएमई (लघु एवं मझोले उद्यमों) को निकट भविष्य में और राजकोषीय मदद देने की गुंजाइश दिखाई देती है। आईएमएफ के राजकोषीय मामलों के विभाग के निदेशक विटोर गैसपर ने पीटीआई-भाषा से कहा कि मौजूदा समर्थनकारी उपायों (खासकर गरीब लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था) का सफल तरीके से क्रियान्वयन काफी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत में कोविड-19 महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए हुए खासकर वंचित परिवारों और एसएमई को निकट भविष्य में और राजकोषीय मदद देने की गुंजाइश है।’’ गैसपर ने कहा कि भारत पर कोविड-19 का आर्थिक प्रभाव काफी बड़ा और व्यापक है। उच्च आवृत्ति वाले संकेतक बताते हैं कि आर्थिक गतिविधियों में तीव्र गिरावट आयी है। यह औद्योगिक उत्पादन, व्यापार धारणा (परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स), वाहनों की बिक्री और व्यपार से प्रतिबिंबित होता है।

जून में जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 में आर्थिक वृद्धि घटकर शून्य से नीचे - 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

अप्रैल के विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट के मुकाबले जून की रिपोर्ट में वृद्धि में अधिक गिरावट का अनुमान का कारण भारत में लगातार कोविड-19 के बढ़ते मामले हैं।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘स्थिति को देखते हुए मुद्राकोष ने दो व्यवस्था की है। पहला, आंशिक ‘लॉकडाउन’ की जो अवधि का अनुमान था, उसे बढ़ाया गया। दूसरा, हमने पुनरूद्धार की गति को लेकर अधिक संकीर्ण अनुमान रखा है। इसका कारण स्वास्थ्य संकट है जिसे अब तक काबू में नहीं लाया जा सका है।’’ मुद्राकोष के अधिकारी ने कहा कि अल्पकाल में भारत में वृद्धि परिदृश्य पर वैश्विक और घरेलू नरमी तथा कोरोना वायरस महामारी को लेकर अनिश्चितताओं का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का राजकोषीय घाटा 2020-21 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 12.1 प्रतिशत पहुंच जाने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण कारण कर राजस्व में कमी के साथ बाजार मूल्य पर आधारित जीडीपी वृद्धि में गिरावट का प्रभाव है। साथ ही अन्य वृहत आर्थिक तत्वों को अधिक अनिश्चितता बने रहने की आशंका है। गैसपर ने कहा, ‘‘इन सब चीजों और आर्थिक गतिविधियों में गिरावट को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत का सार्वजनिक कर्ज जीडीपी अनुपात के रूप में करीब 84 प्रतिशत तक पहुंच जाने का अनुमान है।’’ वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमित मामलों की संख्या बढ़कर 1.22 करोड़ पर पहुंच गयी है जबकि 5.54 लाख लोगों की मौत हुई है। वहीं भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कोविड-19 संक्रमित लोगों की संख्या 7.93 लाख पहुंच गयी जबकि 21,604 लोगों की मौत हुई है।


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PTI News Agency

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