चीन का मास्टरस्ट्रोक: होर्मुज बंद फिर भी बेफिक्र... ढूंढ लिया ‘नया ईरान’! बैकडोर से आ रहे पेट्रोल-LPG भंडार
punjabkesari.in Wednesday, Mar 25, 2026 - 06:15 PM (IST)
International Desk: मिडिल ईस्ट में युद्ध और Strait of Hormuz पर संकट के बावजूद चीन (China में तेल की भारी कमी नहीं देखी जा रही। इसकी बड़ी वजह है कि चीन ने अपनी ऊर्जा सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते पहले ही तैयार कर लिए थे। चीन के लिए Myanmar अब सिर्फ पड़ोसी देश नहीं, बल्कि एक रणनीतिक “बैकडोर” बन चुका है। चीन-Myanmar Economic Corridor (CMEC) के जरिए वह सीधे हिंद महासागर तक पहुंच बना रहा है, जिससे उसे पारंपरिक समुद्री रास्तों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
चीन की सबसे बड़ी चिंता “मलक्का डिलेमा” रही है, यानी Strait of Malacca पर निर्भरता। उसे डर है कि किसी संघर्ष की स्थिति में अमेरिका या भारत इस रास्ते को ब्लॉक कर सकते हैं। ऐसे में म्यांमार के जरिए बनाया गया वैकल्पिक मार्ग उसके लिए सुरक्षा कवच बन गया है। चीन ने म्यांमार के क्यायुकफ्यू पोर्ट से अपने कुनमिंग शहर तक बड़ी तेल और गैस पाइपलाइन बिछाई है। इन पाइपलाइनों के जरिए खाड़ी और अफ्रीका से आने वाला तेल सीधे चीन पहुंचता है, जिससे समुद्री जोखिम कम हो जाता है।
बताया जाता है कि यह पाइपलाइन हर साल करोड़ों टन कच्चा तेल और अरबों क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई कर सकती है। इससे चीन को होर्मुज या अन्य संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। इसके साथ ही चीन “String of Pearls” रणनीति के तहत हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। बंदरगाह, इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के जरिए वह क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।
वहीं भारत ने Great Nicobar Island पर नया एयरपोर्ट और सैन्य बेस बनाकर चीन की इस रणनीति को चुनौती देने की कोशिश की है। यह इलाका मलक्का जलडमरूमध्य के पास होने के कारण बेहद रणनीतिक माना जाता है। कुल मिलाकर, चीन ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पहले से तैयारी कर रखी थी। म्यांमार के जरिए बनाया गया यह वैकल्पिक रास्ता उसे वैश्विक तेल संकट के बड़े असर से बचा रहा है।
