अमेरिका की कार्रवाई पर बंटी दुनिया: वेनेजुएला ऑपरेशन से ब्रिटेन ने झाड़ा पल्ला, PM स्टारमर का बड़ा बयान
punjabkesari.in Saturday, Jan 03, 2026 - 07:53 PM (IST)
London: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के लिए अमेरिका द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक स्तर पर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या अमेरिका ने एक संप्रभु देश के खिलाफ युद्ध जैसा कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय कानून के कई विशेषज्ञों का मानना है कि किसी देश के प्रमुख को सैन्य बल के जरिए दूसरे देश से पकड़ना संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है। इसी बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस पूरे ऑपरेशन में ब्रिटेन की कोई भी भूमिका नहीं थी।स्टारमर ने कहा कि फिलहाल ब्रिटेन की सर्वोच्च प्राथमिकता वेनेजुएला में मौजूद लगभग 500 ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
🇬🇧🇻🇪 UK PM STARMER: “WE WERE NOT INVOLVED IN THE VENEZUELA OP”
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) January 3, 2026
UK PM Starmer says Britain had zero involvement in the U.S. military operation that removed Maduro from power in Venezuela.
While calling for calm and fact-finding, he made clear that London is focusing on… https://t.co/vCvQ0h8Qm6 pic.twitter.com/ZzXYIzHeFz
उन्होंने बताया कि लंदन सरकार कराकस स्थित ब्रिटिश दूतावास के साथ मिलकर हालात पर करीबी नजर रखे हुए है और नागरिकों को आवश्यक सलाह दी जा रही है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की पूरी तरह पुष्टि जरूरी है। उन्होंने कहा, “हमें पहले सच जानना होगा और फिर आगे का रास्ता तय करना होगा।” स्टारमर ने यह भी संकेत दिया कि वह जल्द ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य सहयोगी देशों के नेताओं से बातचीत करेंगे। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि अभी तक ट्रंप से उनकी सीधी बात नहीं हुई है।
ब्रिटिश सरकार फिलहाल डैमेज-कंट्रोल मोड में है और इस बात को लेकर चिंतित है कि हालात कहीं और न बिगड़ जाएं। लंदन की कोशिश है कि संकट और न फैले तथा क्षेत्रीय अस्थिरता से बचा जा सके।अमेरिका का पक्ष इससे अलग है। ट्रंप प्रशासन मादुरो को वेनेजुएला का वैध राष्ट्रपति नहीं मानता। अमेरिका 2024 के विवादित चुनाव के बाद एडमुनदो गोंजालेज़ उरुतिया को ‘राष्ट्रपति-निर्वाचित’ मानता है।
वाशिंगटन का दावा है कि मादुरो एक “नार्को-आतंकी” है, जिस पर 2020 में अमेरिकी अदालत ने ड्रग तस्करी और कोलंबियाई गुरिल्ला संगठनों से संबंध रखने के आरोप लगाए थे। मादुरो की गिरफ्तारी पर अमेरिका ने 50 मिलियन डॉलर का इनाम भी घोषित किया था। इस कार्रवाई के बाद रूस और ईरान ने अमेरिका पर अवैध सैन्य आक्रमण का आरोप लगाया है। यूरोपीय संघ ने संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि मादुरो की वैधता पर सवाल हैं। वहीं कोलंबिया ने संयुक्त राष्ट्र की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। कानूनी रूप से बहस चाहे जो हो, हकीकत यह है कि मादुरो अब अमेरिकी हिरासत में हैं।
