पाकिस्तान के अब्राहम समझौते से इंकार पर भड़का अमेरिकाः जमकर लगाई फटकार, कहा-‘इजराइल विरोधी देश नहीं बन सकता मध्यस्थ’
punjabkesari.in Wednesday, May 27, 2026 - 11:15 AM (IST)
Washington: अमेरिका में रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम( Lindsey Graham) ने पाकिस्तान (Pakistan) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की इजराइल विरोधी सोच और पुरानी नीतियां उसकी मध्यस्थता को “दोषपूर्ण” बनाती हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) ने कहा कि पाकिस्तान अब्राहम समझौते में शामिल होने के पक्ष में नहीं है।अब्राहम समझौता इजराइल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध सामान्य करने से जुड़ा समझौता है। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से इस नीति पर कायम है कि जब तक 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र नहीं बनता, तब तक पाकिस्तान इजराइल को मान्यता नहीं देगा।
इसके बाद लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका केवल “दोषपूर्ण” ही नहीं बल्कि इजराइल के प्रति उसकी पुरानी दुश्मनी भी साफ दिखाई देती है। ग्राहम ने कहा कि पाकिस्तान को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की उस अपील का जवाब देना चाहिए जिसमें अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता करने वाले देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने को कहा गया था। अमेरिकी सांसद ने यह भी कहा कि भले ही ख्वाजा आसिफ का एक वीडियो पुराना हो, लेकिन उन्हें लगता है कि पाकिस्तान की सोच आज भी वही बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को साफ करना चाहिए कि वह इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने को लेकर क्या रुख रखता है। लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान पर एक और गंभीर आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें सामने आई हैं कि ईरानी सैन्य विमान पाकिस्तान के हवाई अड्डों पर रखे गए थे। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले भी इजराइल विरोधी बयान दिए हैं, जिससे अमेरिका में चिंता बढ़ी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और कई देश युद्ध रोकने के लिए कूटनीतिक कोशिशों में लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की विदेश नीति, फलस्तीन मुद्दे पर उसका रुख और इजराइल को मान्यता न देने की नीति आने वाले समय में अमेरिका के साथ उसके संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
