UN मुख्यालय के बाहर खौफनाक मंजर: तिब्बती झंडा लिए शख्स ने खुद को लगाई आग, मौत का LIVE Video Viral
punjabkesari.in Friday, Jul 03, 2026 - 09:46 AM (IST)
Tibetan Protest New York : अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के सामने एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक 52 वर्षीय व्यक्ति ने खुद को आग लगा ली जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। घटना के वक्त उस व्यक्ति के हाथ में तिब्बती झंडा था। स्थानीय पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।
न्यूयॉर्क पुलिस विभाग के अनुसार शाम करीब साढ़े छह बजे सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और देखा कि 52 वर्षीय व्यक्ति बुरी तरह जली हुई अवस्था में था। पुलिस के मुताबिक उस व्यक्ति को अस्पताल ले जाया गया जहां बाद में उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस आत्मदाह की घटना की जांच कर रही है।
Tibetans stood outside the United Nations carrying the voice Loga Rangzen gave his life to Tibet.
— Bodpa Warriors (@BodpaW) July 3, 2026
After his death from self immolation, they called on the UN to hold the Chinese Communist Party accountable for the repression that continues to push Tibetans to such unimaginable… pic.twitter.com/dSDZA2SFYG
अधिकारियों का कहना है कि वे इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते कि उस व्यक्ति ने खुद को आग क्यों लगाई।
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पुलिस के अनुसार उस व्यक्ति का नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है क्योंकि उसके परिवार को अभी तक इसकी सूचना नहीं दी गई है। संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह घटना दिन की सभी निर्धारित बैठकें खत्म होने के बाद हुई।
BREAKING: Tibetan activist Lobga Rangzen has died following a protest outside the United Nations headquarters in New York.
— RAHUL SHARMA 🇮🇳 (@KumarRahul65453) July 3, 2026
Before the incident, he reportedly livestreamed an appeal calling for Tibetan independence and unity.
The tragedy has once again drawn attention to the… pic.twitter.com/WROa0pcmOI
चीन का कहना है कि तिब्बत 13वीं सदी के मध्य से उसके क्षेत्र का हिस्सा रहा है और 1951 से उसकी कम्युनिस्ट पार्टी इस हिमालयी क्षेत्र पर शासन कर रही है लेकिन कई तिब्बतियों का कहना है कि वे अपने इतिहास के ज़्यादातर समय में असल में आज़ाद थे और चीनी सरकार संसाधनों से भरपूर इस इलाके का फायदा उठाना चाहती है साथ ही उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी खत्म करना चाहती है।
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चीन तिब्बत की निर्वासित सरकार को मान्यता नहीं देता और 2010 से उसने दलाई लामा के प्रतिनिधियों के साथ कोई बातचीत नहीं की है।
