यूरोप में आग उगल रहा मौसमः भीषण हीटवेव की चपेट में 800 से ज्यादा शहर, फ्रांस में 40 लोगों की मौत

punjabkesari.in Saturday, Jun 27, 2026 - 03:35 PM (IST)

International Desk: यूरोप इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस, स्पेन, इटली, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम, पोलैंड, क्रोएशिया और हंगरी  सहित कई देशों में तापमान ने जून के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार की रिकॉर्ड गर्मी के पीछे मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन (Climate Change) है। उनके अनुसार, अल-नीनो का कुछ प्रभाव जरूर है, लेकिन वर्तमान हीटवेव के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी लगातार बढ़ते वैश्विक तापमान की है।  वैज्ञानिकों ने यूरोप के 800 से अधिक शहरों के मौसम संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया। इनमें लगभग 45 प्रतिशत शहरों में जून के अंतिम दिनों में अत्यधिक गर्मी दर्ज की गई या उसके दर्ज होने की संभावना जताई गई।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, जब शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा नहीं रख पाता, तो हीट स्ट्रेस की स्थिति पैदा होती है, जिससे हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इस बार सबसे बड़ी चिंता रात के तापमान को लेकर है। सामान्य तौर पर रात में तापमान गिरने से शरीर को राहत मिलती है, लेकिन इस बार कई क्षेत्रों में ऐसा नहीं हो रहा। फ्रांस के कई इलाकों में एक सप्ताह से अधिक समय तक रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा, जबकि कुछ स्थानों पर रात में भी तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया।

 

कई देशों में रेड और ऑरेंज अलर्ट

  • फ्रांस के आधे से अधिक हिस्से में रेड हीट अलर्ट जारी किया गया है।
  • नीदरलैंड्स के कई क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट लागू है।
  • जर्मनी में सप्ताहांत तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है।
  • पोलैंड, क्रोएशिया और हंगरी में भी गंभीर गर्मी की चेतावनी जारी की गई है।


 

फ्रांस में 40 मौतें, बिजली और स्कूल प्रभावित
फ्रांस में पिछले सप्ताह से हीटवेव से जुड़ी घटनाओं में 40 लोगों की मौत की सूचना है। वहीं ब्रिटेन में तेज गर्मी के कारण कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है और कई स्कूलों को बंद करना पड़ा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अल-नीनो दुनिया के कई हिस्सों में तापमान बढ़ाने में भूमिका निभाता है, लेकिन इस बार यूरोप की रिकॉर्ड गर्मी का मुख्य कारण नहीं है। उनका कहना है कि कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों ने पृथ्वी का औसत तापमान औद्योगिक युग से पहले की तुलना में लगभग 1.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ा दिया है। 

 

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी नहीं लाई गई, तो आने वाले वर्षों में ऐसी भीषण हीटवेव और अधिक बार तथा अधिक तीव्रता के साथ देखने को मिल सकती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में यूरोप में भीषण गर्मी के कारण 60,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, इसलिए मौजूदा स्थिति को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Tanuja

Related News