Iran War के बाद बंद होने लगे इन देशों के स्कूल और ऑफिस, कहीं लागू हुआ 4-डे वर्क तो कहीं Work From Home

punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 10:46 AM (IST)

Global Energy Crisis : मिडिल ईस्ट में बारूद बरस रहा है लेकिन इसकी तपिश एशिया के दफ्तरों और क्लासरूम तक महसूस की जा रही है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने से खाड़ी देशों से आने वाला 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन का तेल प्रवाह रुक गया है। इस सप्लाई चेन के टूटने से थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे देशों में ईंधन का अकाल पड़ गया है जिसके बाद वर्क फ्रॉम होम और स्कूल बंदी जैसे आपातकालीन कदम उठाए गए हैं।

एशियाई देशों का संकट काल: कहां क्या बदले नियम?

देश उठाए गए सख्त कदम
पाकिस्तान पूरे देश में स्कूल 2 हफ्ते के लिए बंद; पंजाब में 31 मार्च 2026 तक छुट्टियां। दफ्तरों में 4-डे वर्क वीक और 50% स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम।
फिलीपींस राष्ट्रपति ने '4-डे वर्क वीक' का आदेश दिया। यहाँ 90% तेल खाड़ी देशों से आता है जिससे अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
थाईलैंड सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश। दफ्तरों में AC का तापमान 26 डिग्री पर फिक्स किया गया।
वियतनाम जनता से कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की अपील। कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
बांग्लादेश तेल की राशनिंग शुरू। यूनिवर्सिटीज बंद कर दी गई हैं ताकि बिजली और ट्रांसपोर्ट का खर्च कम हो सके।
श्रीलंका घबराहट में खरीदारी (Panic Buying) रोकने के लिए ईंधन की कीमतों में भारी इजाफा।

सप्लाई का गला घोंटा: क्या है होर्मुज का संकट?

दरअसल एशिया को मिलने वाला अधिकांश तेल समुद्री रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से होकर गुजरता है। युद्ध की वजह से ईरान ने इस संकरे रास्ते पर पहरा लगा दिया है। जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे बड़े देश अब अपनी जरूरतों के लिए अपने इमरजेंसी ऑयल रिजर्व (आपातकालीन भंडार) खोलने पर विचार कर रहे हैं। ताइवान और दक्षिण कोरिया में तेल की कीमतें 30 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने की आशंका है।

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भारत और ऑस्ट्रेलिया का हाल

  • भारत: फिलहाल पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सामान्य है लेकिन विमान ईंधन (Jet Fuel) महंगा होने से हवाई किराए 15% तक बढ़ गए हैं। एलपीजी (LPG) की डिलीवरी में भी देरी हो रही है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं।

  • ऑस्ट्रेलिया: यहां सप्लाई की कमी नहीं है लेकिन लोग डर के मारे तेल का स्टॉक जमा कर रहे हैं (Demand Spike) जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई है।

यूरोप पर भी मंडराया खतरा

भले ही यूरोप सीधे इस रास्ते पर निर्भर न हो लेकिन वह अपना 50% जेट फ्यूल खाड़ी देशों से ही मंगाता है। नॉर्थवेस्ट यूरोप में जेट फ्यूल की कीमत $1,500 प्रति टन तक पहुंच गई है जिससे वहां बिजली और माल ढुलाई महंगी हो गई है।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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